दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में ब्लैक फंगस( म्यूकॉरमाईकोसिस) से पीड़ित मरीजों को दिए गए इंजेक्शन से उनकी तबीयत खराब होने का मामला सामने आया है। मरीजों के परिजों का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने फंगस के इलाज में इस्तेमाल होने वाला दूसरा इंजेक्शन लगाया है। इससे उनके मरीजों को दुष्प्रभाव हुआ है। म्यूकोरमायकोसिस (फंगस) के मरीजों को दिए गए इंजेक्शन के दुष्प्रभाव से सात मरीजों की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है।
अस्पताल के म्यूकॉर वार्ड नंबर दो में भर्ती मरीज आशा देवी( बदला हुआ नाम) के बेटे विकास ने बताया कि उनकी मां को पहले एम्फोटेरिसिन बी इमल्सन इंजेक्शन दिया गया था, जबकि इससे पहले कई दिनों से लगातार उन्हें लाइपोजोमल एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन दिया जा रहा था। उससे कोई परेशानी नहीं हुई थी। जबकि शनिवार दोपहर को जब यह दूसरी तरह का इंजेक्शन दिया गया तो कुछ ही मिनट बाद ही मरीज को तेज कंपकपी के साथ बुखार, उल्टी और दश्त और गंभीर पेट दर्द कि शिकायत होने लगी। हालत बिगड़ते देख डाक्टरों ने तुरंत आपात विभाग में इलाज शुरू किया।
विकास ने बताया कि उनकी मां 17 मई से अस्पताल में भर्ती हैं। 25 मई को उनकी सर्जरी हुई है। भर्ती होने के साथ से ही मरीज को लगातार फंगस के इंजेक्शन दिए जा रहे थे। लेकिन दोपहर में दिए गए इंजेक्शन से उनकी मां को ठंड के साथ तेज बुखार आ गया और उल्टियां भी होने लगीं। वहीं, अस्पताल में भर्ती एक अन्य मरीज की पत्नी ने बताया कि उनके पति को इंजेक्शन की सिर्फ 10 एमएल डोज ही चढ़ पाई थी। इतनी ही देर में तबीयत खराब हो गई। इसी तरह के मामले तीन अन्य मरीजों में भी आए हैं। सभी का आरोप है कि ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख इंजेक्शन की कमी के कारण दूसरा इंजेक्शन दिया गया है।
इम मामले में लोकनायक अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉक्टर सुरेश कुमार ने कहा कि मरीजों के आरोप निराधार हैं। सिर्फ दो ही मरीजों को हल्की ठंड के साथ बुखार होने की घटना सामने आई है। उन्होंने मरीजों को गलत इंजेक्शन दिए जाने की बात से इनकार किया है। डॉ. सुरेश ने कहा कि मरीजों को पहले से ही दोनों तरह के इंजेक्शन लाइपोजोमल एम्फोटेरिसिन बी और एम्फोटेरिसिन बी इमल्सन दिए जा रहे हैं। इस बार इंजेक्शन देने से परेशानी क्यों हुई इस बात की जानकारी ली जा रही है।अगर कोई लापरवाही सामने आई तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।