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दिल्ली का हाल : ब्लैक फंगस के 70 फीसदी मरीज मधुमेह से ग्रस्त, जरूरी है नियंत्रण

Sun, 06 Jun 2021 02:01 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली

सार

  • दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हुए रोगियों की जांच में आया सामने
  • एक हजार के पार पहुंच चुकी है कुल मरीजों की संख्या
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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राजधानी के दो बड़े अस्पतालों में ब्लैक फंगस (म्यूकॉर माइकोसिस) का इलाज करा रहे करीब 70 फीसदी मरीज मधुमेह से भी पीड़ित पाए गए हैं। जांच के दौरान यह बात सामने आई है। इससे पता चलता है कि कोरोना संक्रमण के अलावा मधुमेह भी ब्लैक फंगस होने का एक प्रमुख कारण है। डॉक्टरों का कहना है कि ब्लैक फंगस से बचाव के लिए शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखना बहुत जरूरी है।
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दिल्ली में ब्लैक फंगस के एक हजार ज्यादा मामले आ चुके हैं। इनमें से 89 की मौत हो चुकी है और 92 स्वस्थ हुए हैं। कई बड़े सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों का इलाज चल रहा है। सर गंगाराम अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल में 100 से ज्यादा मरीज भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 70 फीसदी रोगी मधुमेह से पीड़ित मिले हैं। इनमें कुछ ऐसे हैं जिनका पहले से ही शुगर नियंत्रण में नहीं थी। बाकी के मरीजों में कोरोना के इलाज के दौरान दी गई दवाओं के चलते शुगर का स्तर बढ़ गया था।

डॉक्टर ने बताया कि जांच से यह पता चलता है कि कोरोना संक्रमित या इससे स्वस्थ हुए जिन रोगियों के शरीर में शुगर का स्तर नियंत्रण में नहीं रहा, अधिकतर वह ही ब्लैक फंगस ग्रसित हुए हैं। अस्पताल में भर्ती हुए 22 रोगियों की स्थिति काफी बिगड़ गई थी। उनकी जान बचाने के 
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लिए आंख की सर्जरी की गई।

जीटीबी अस्पताल के म्यूकॉर वार्ड में तैनात एक डॉक्टर ने बताया कि उनके यहां ब्लैक फंगस के 107 मरीज भर्ती हैं। इनमें करीब 75 रोगी मधुमेह से पीड़ित थे। साथ ही कोरोना के इलाज के दौरान इन मरीजों को स्ट्रॉयड भी दिए गए थे। इस कारण उनके शरीर में शुगर का स्तर बढ़ गया था, जो बाद में नियंत्रित नहीं हो सका था। इसी कारण वह फंगस की चपेट में आ गए थे।

ऐसे रखें शुगर को नियंत्रित
  • सुबह रोज टहलें और व्यायाम करें।
  • पालक, करेला, लौकी, गोभी आदि हरी सब्जियों का सेवन करें। 
  • मेथी दाने का सेवन करें। यह रक्त में शुगर के स्तर को कम करने में बेहद फायदेमंद है। रोजाना इसका सेवन करने से शुगर का स्तर नियंत्रण में रहेगा।
  • रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने के लिए शरीर में विटामिन-डी का स्तर बनाए रखें। इसके लिए नियमित तौर पर धूप लेते रहें।
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ब्लैक फंगस का इंजेक्शन देने से पांच मरीजों की तबियत बिगड़ी

दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में ब्लैक फंगस( म्यूकॉरमाईकोसिस)  से पीड़ित मरीजों को दिए गए इंजेक्शन से उनकी तबीयत खराब होने का मामला सामने आया है। मरीजों के परिजों का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने फंगस के इलाज में इस्तेमाल होने वाला दूसरा इंजेक्शन लगाया है। इससे उनके मरीजों को दुष्प्रभाव हुआ है।  म्यूकोरमायकोसिस (फंगस) के मरीजों को दिए गए इंजेक्शन के दुष्प्रभाव से सात मरीजों की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। 

अस्पताल के म्यूकॉर वार्ड नंबर दो में भर्ती मरीज आशा देवी( बदला हुआ नाम) के बेटे विकास ने बताया कि उनकी मां को पहले  एम्फोटेरिसिन बी इमल्सन इंजेक्शन दिया गया था, जबकि इससे पहले कई दिनों से लगातार उन्हें लाइपोजोमल एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन दिया जा रहा था। उससे कोई परेशानी नहीं हुई थी। जबकि शनिवार दोपहर को जब यह दूसरी तरह का इंजेक्शन दिया गया तो कुछ ही मिनट बाद ही मरीज को तेज कंपकपी के साथ बुखार, उल्टी और दश्त और गंभीर पेट दर्द कि शिकायत होने लगी। हालत बिगड़ते देख डाक्टरों ने तुरंत आपात विभाग में इलाज शुरू किया। 

विकास ने बताया कि उनकी मां 17 मई से अस्पताल में भर्ती हैं।  25 मई को उनकी सर्जरी हुई है। भर्ती होने के साथ से ही मरीज को लगातार फंगस के इंजेक्शन दिए जा रहे थे। लेकिन दोपहर में दिए गए इंजेक्शन से उनकी मां को ठंड के साथ तेज बुखार आ गया और उल्टियां भी होने लगीं। वहीं, अस्पताल में भर्ती एक अन्य मरीज की पत्नी ने बताया कि उनके पति को  इंजेक्शन की सिर्फ 10 एमएल डोज ही चढ़ पाई थी। इतनी ही देर में तबीयत खराब हो गई। इसी तरह के मामले तीन अन्य मरीजों में भी आए हैं। सभी का आरोप है कि ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख इंजेक्शन  की कमी के कारण दूसरा इंजेक्शन दिया गया है। 

इम मामले में  लोकनायक अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉक्टर सुरेश कुमार ने कहा कि मरीजों के आरोप निराधार हैं। सिर्फ दो ही मरीजों को हल्की ठंड के साथ बुखार होने की घटना सामने आई है। उन्होंने मरीजों को गलत इंजेक्शन दिए जाने की बात से इनकार किया है। डॉ. सुरेश ने कहा कि  मरीजों को पहले से ही दोनों तरह के इंजेक्शन लाइपोजोमल एम्फोटेरिसिन बी और एम्फोटेरिसिन बी इमल्सन दिए जा रहे हैं। इस बार इंजेक्शन देने से परेशानी क्यों हुई इस बात की जानकारी ली जा रही है।अगर कोई लापरवाही सामने आई तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 
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