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एमसीडी उपचुनाव: 51 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद, सिर्फ 38.51 फीसदी हुआ मतदान, तीन दिसंबर को मतगणना

Sun, 30 Nov 2025 09:38 PM IST
राहुल तिवारी अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

एमसीडी के 12 वार्डों के उपचुनाव में मात्र 38.51 फीसदी मतदान हुआ, जो 2022 की तुलना में लगभग 10.5 प्रतिशत कम है। वोटरों की उदासीनता के बावजूद कुछ केंद्रों पर सुबह और शाम चहल-पहल रही। 51 प्रत्याशियों का भविष्य ईवीएम में कैद हो चुका है।

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एमसीडी उपचुनाव में 38.51 फीसदी मतदान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एमसीडी के 12 वार्डों के उपचुनाव में रविवार को मात्र 38.51 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप, स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों की सक्रियता के बावजूद वोटरों की गर्मजोशी फीकी रही। अब 51 प्रत्याशियों का भविष्य ईवीएम में कैद हो चुका है, जिसका फैसला बुधवार को होगा। इन वार्डों में वर्ष 2022 के आम चुनाव की तुलना में लगभग 10.5 प्रतिशत कम मतदान हुआ, जो निगम उपचुनावों में मतदाता उदासीनता का संकेत देता है।

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दिल्ली राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, सुबह मतदान शुरू होते ही कई केंद्रों पर चहल-पहल दिखी और शाम तक मतदान हुआ, लेकिन दोपहर के चार घंटों को छोड़कर मतदान की रफ्तार धीमी रही। चार वार्डों में पूरा दिन मतदान की रफ्तार बनी रही। उनमें शाम 5:30 बजे के बाद भी मतदाता लाइनों में लगे रहे और कुछ केंद्रों पर मतदान छह बजे तक चलता रहा।

इन उपचुनावों में सबसे दिलचस्प तस्वीर चांदनी महल वार्ड में देखने को मिली, जहां 55.93 प्रतिशत मतदान हुआ, जो न केवल सभी वार्डों में सबसे अधिक है, बल्कि 2022 के आम चुनाव में यहां पड़े मतों से भी अधिक है। चांदनी महल में मुकाबला खासा त्रिकोणीय है। आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और इस इलाके से छह बार विधायक रहे और मौजूदा विधायक मोहम्मद आले इकबाल के पिता शोएब इकबाल का प्रभाव चुनावी मैदान में साफ दिखा। इस कारण स्थानीय स्तर पर वोटरों में अपेक्षाकृत अधिक उत्साह देखने को मिला। 
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इसके विपरीत ग्रेटर कैलाश वार्ड में मतदान सबसे कम रहा। यहां केवल 26.76 प्रतिशत मतदाता ही घरों से बाहर निकले। उच्च आवासीय बस्तियों और अपेक्षाकृत शहरीकृत इलाकों में कम मतदान का पैटर्न इस उपचुनाव में भी दोहराया गया। द्वारका-बी, शालीमार बाग-बी, अशोक विहार और चांदनी चौक में भी मतदान 30 से 38 प्रतिशत के बीच सिमटा रहा।

मुंडका, नारायणा, संगम विहार-ए और दक्षिणपुरी जैसे वार्डों में मतदान ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। इन क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दों खासकर सफाई व्यवस्था, जलभराव, सीवर लाइन, अनधिकृत कॉलोनियों की समस्याओं और परिवहन सुविधाओं ने मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक खींचा। मुंडका और संगम विहार में शाम छह बजे तक मतदान जारी रहने की वजह भी यही मानी गई कि लोग कामकाज से लौटने के बाद बड़ी संख्या में पहुंचते रहे।

दिल्ली राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक, उपचुनावों को शांतिपूर्ण कराने के लिए पर्याप्त प्रबंध किए गए थे। कई सेंटर तकनीक आधारित मॉनिटरिंग से लैस थे और सुरक्षा बल तैनात रहे। आयोग ने बताया कि मतदान समाप्ति के बाद सभी ईवीएम सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम में जमा कर दी गई हैं।

राजनीतिक तौर पर यह उपचुनाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2027 के अगले एमसीडी चुनावों से पहले यह छोटे से छोटे वार्ड भी राजनीतिक दलों के लिए जनमत का संकेत बन सकते हैं। भाजपा, आप और कांग्रेस तीनों पार्टियों ने इसे प्रतिष्ठा का चुनाव मानकर आखिरी दिन तक जोर लगाया था। अब निगाहें बुधवार को होने वाली मतगणना पर टिक गई हैं, जब यह तय होगा कि मतदाताओं की चुप्पी किस दल के लिए लाभ और किसके लिए नुकसान लेकर आएगी।

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