कोरोना को हराने के लिए देश में विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चल रहा है। पहले चरण में स्वास्थ्यकर्मी के साथ-साथ सफाईकर्मियों का भी टीकाकरण किया जा रहा है। महामारी के खिलाफ बड़े अभियान में मंगलवार को दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में 27 और सफदरजंग अस्पताल में 30 स्वास्थ्यकर्मियों ने कोरोना की वैक्सीन लगवाई। अस्पताल के प्रवक्ता ने यह जानकारी दी है।
वहीं दूसरी तरफ सोमवार को दिल्ली में हुए टीकाकरण अभियान में कुल 26 लोगों में दुष्प्रभाव नजर आए थे। इनमें से एक रेजिडेंट डॉक्टर को सीने में दर्द की शिकायत के बाद ताहिरपुर के राजीव गांधी सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका उपचार कर रही है। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल के एक रेजिडेंट डॉक्टर को टीके लगने के कुछ घंटों बाद सीने में दर्द की शिकायत हुई थी। देर रात उन्हें राजीव गांधी अस्पताल लाया गया था।
टीकाकरण की शुरुआत 16 जनवरी शनिवार को हुई थी। लेकिन उसी दिन आरएमएल में कोवैक्सीन के बजाय कोविशील्ड वैक्सीन लगाने की मांग उठने लगी थी। रेजीडेंट डॉक्टरों ने कोवैक्सीन को लेकर आपत्ति दर्ज करवाई थी। जिसके चलते शनिवार को अस्पताल में 100 में से केवल 31 ही लोगों ने वैक्सीन लगवाई थी। डॉक्टरों ने कोविशील्ड का टीका लगाने की बात एक पत्र लिखकर अस्पताल प्रबंधन के सामने रखी थी।
जांच में पता चला कि डॉक्टर का ह्रदय सामान्य गति से नहीं धड़क रहा है। उनकी ह्रदय गति अचानक से बढ़ रही है। इसको देखते हुए उन्हें तुरंत आईसीयू में भर्ती किया गया। जहां डॉक्टरों की एक टीम उनकी जांच कर रही है। अस्पताल के एक डॉक्टर का कहना है कि दिल्ली में कोविड वैक्सीनेशन कार्यक्रम में अभी तक का यह ऐसा पहला मामला है, जहां किसी को टीके लगने के बाद ह्रदय में कुछ समस्या हुई है।