नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े राजनगर (दिल्ली कैंट) मामले में उम्रकैद की सजा पा चुके पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोखर को 21 दिन की अस्थायी रिहाई (फर्लो) दे दी है। न्यायमूर्ति रविंद्र डुडेजा की एकल पीठ ने यह आदेश देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने निश्चित रूप से गंभीर प्रकृति का अपराध किया है, लेकिन फर्लो देने से इंकार करना जेल नियमों का मशीनी इस्तेमाल होगा और यह फर्लो के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर देगा।
अदालत ने बलवान खोखर को अपने पारिवारिक एवं सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए यह राहत दी। उसे 20,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानतदार पर रिहा करने का निर्देश दिया गया है। फर्लो के दौरान बिना पूर्व अनुमति के वह दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन के क्षेत्राधिकार से बाहर नहीं जा सकेगा। हर मंगलवार सुबह 10 बजे स्थानीय पुलिस स्टेशन में हाजिरी देनी होगी। पीठ ने अपने फैसले में कहा कि फर्लो का प्रावधान सुधारात्मक न्यायशास्त्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिसका मकसद दोषी को परिवार और समाज से जुड़े रहने तथा अपनी आवश्यक जिम्मेदारियां निभाने का मौका देना है। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि खोखर पिछले लगभग 11 साल 10 महीने से है और जेल में उसका आचरण संतोषजनक रहा है। संवाद