दिल्ली की सात संसदीय सीटों के लिए बृहस्पतिवार को हुए मतदान में जमकर वोट बरसे। 30 साल बाद 64.77 फीसदी मतदान का रिकार्ड बना। यह वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव की तुलना में 13 फीसदी है।
इससे पहले दिल्ली में आखिरी बार 1984 में 65.98 फीसदी मतदान हुआ था। इसके बाद लोकसभा चुनाव 2009 तक कुल आठ बार चुनाव हुए, लेकिन 60 फीसदी का आंकड़ा पार नहीं हो सका।
इस चुनाव में पहली बार वोटिंग के लिए दो घंटे अतिरिक्त समय दिया गया, जिसका दिल्ली वालों ने जमकर फायदा उठाया। छिटपुट घटनाओं को छोड़ मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।
तो छू जाएगा 65 फीसदी का आंकड़ा
दिल्ली की सात सीटों के लिए कुल 150 उम्मीदवार मैदान में हैं। पहली बार एक घंटा पहले सुबह सात बजे दिल्ली के 11 हजार 763 पोलिंग स्टेशनों पर मतदान शुरू हो गया।
सुबह सात बजे से ही लोग पोलिंग स्टेशनों पर वोट डालने पहुंच गए थे। शाम छह बजे तक 64.77 फीसदी वोट पड़े। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक बैलेट पेपर का वोट इसमें नहीं जोड़ा गया है। वह जोड़ दें तो दिल्ली ने 65 फीसदी का आंकड़ा छू लेगा।
इससे पहले दिल्ली में 1980, 1984 और इमरजेंसी के बाद हुए 1977 में 60 फीसदी से ज्यादा मतदान का रिकार्ड है। इस लोकसभा चुनाव में हुआ मतदान दिल्ली विधानसभा चुनाव के बराबर रहा।
वक्त के साथ बढ़ता गया आंकड़ा
दिल्ली ने पहले चार घंटे में 25 फीसदी वोट करके संकेत दे दिया था कि दिल्ली इस बार 60 फीसदी का आंकड़ा पार कर लेगी। सबसे ज्यादा मतदान उत्तरी पूर्वी 67.08 फीसदी हुआ, जबकि सबसे कम उत्तरी पश्चिमी दिल्ली में 61.38 फीसदी हुआ।
इसके अलावा चांदनी चौक में 66.88, नई दिल्ली 65.03, पूर्वी दिल्ली 65.55, पश्चिमी 65.64, दक्षिणी दिल्ली 62.67 फीसदी मतदान हुआ।
पहली बार मतदान के 12 घंटे की लंबी प्रक्रिया में दिल्ली वाले सुबह से वोट डालने के लिए घरों से निकल पड़े। शुरू के एक घंटे में ही दिल्ली के 10 फीसदी से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके थे। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, मतदान प्रतिशत भी बढ़ता चला गया।