गुरुग्राम में 31 वर्षीय युवक युवराज सिंह मनचंदा की हत्या मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। आरोपी युवती आन्या वत्स ने युवराज के शव को तीन दिन अपनी कार में रखा और उसे गुरुग्राम के एक सोसाइटी में पार्क कर दिया था।
सवाल उठता है कि क्या इस कार पर सोसाइटी में किसी की नजर नहीं पड़ी और कार से किसी को शव के सड़ने की बदबू नहीं आई थी। तीन दिन कार में रखने के बाद शव को गुरुग्राम में ही एक नाले में फेंक दिया था। दिल्ली पुलिस की लाजपत नगर थाना पुलिस ने शुक्रवार को गुरुग्राम पहुंचकर सोसाइटी व नाले आदि जगहों को मुआयना किया।
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने युवराज को छह सितंबर को गुरुग्राम बुलाया था। युवती ने युवराज की कार एक जगह पार्क करवा दी और फिर उसे अपनी कार में सुनसान जगह पर बहाने से ले गई। युवराज कार में आगे ड्राइवर के साथ वाली सीट पर बैठा हुआ था।
पीछे बैठी आन्या ने पीछे से युवराज की गर्दन में दो गोलियां मारकर हत्या कर दी थीं। आरोपियों ने कार में शव को रखने के बाद 9 सितंबर को नाले में फेंक दिया था। गुरुग्राम पुलिस को युवराज का शव 10 सितंबर को मिल गया था और पोस्टमार्टम कराकर 14 सितंबर को उसका अंतिम संस्कार करवा दिया था।
दूसरी तरफ युवराज की बहन ने 11 सितंबर को लाजपत नगर में भाई के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आन्या युवराज के फोन को चलाती रही। परिजन जब फोन करते तो ये मैसेज डालकर युवराज बनकर बताती थी कि वह व्यस्त है और एक दो दिन में आ जाएगा।
युवराज सिंह मनचंदा की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
इस तरह ये युवराज की बहन हरसिमरन को टरकाते रहे। आरोपियों ने 10 सितंबर को युवराज का फोन बंद कर दिया था। लाजपत नगर पुलिस ने आन्या और उसके सहयोगी संयम सचदेवा को उत्तराखंड से गिरफ्तार कर लिया।
कारण बताया
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आन्या ने बताया कि उसे गुप्ता नाम का व्यक्ति ब्लैकमेल करता था। उसने युवराज की हत्या करने को बोला था। वह गुप्ता से वर्ष 2022 में मिली थी। कभी पैसे को लेकर हत्या करने की बात कहती है।
लिव इन में रह रहे थे दोनों
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आन्या व संयम काफी समय से सहमति संबंधों में रह रहे थे। इनका एक बच्चा भी है। संयम के खिलाफ शाहदरा में घरेलू हिंसा का मामला दर्ज है। आन्या के खिलाफ संसद मार्ग थाने में सवा करोड़ की ठगी की शिकायत है।
युवराज सिंह मनचंदा की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
यह था पूरा मामला
दक्षिण दिल्ली के लाजपत नगर में मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा की हत्या कर शव को गुरुग्राम में फेंकने, गुरुग्राम पुलिस के द्वारा शव को अज्ञात समझकर अंतिम संस्कार करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। खास बात है कि इससे दिल्ली पुलिस व गुरुग्राम पुलिस के बीच कोर्डिशन व पुलिस तंत्र के जिपनेट पर बड़े सवाल खड़े होते हैं।
दिल्ली पुलिस ने हत्या करने के आरोप में 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा की दोस्त रही और पहले साथ काम चुकी युवती आन्या वत्स और उसके दोस्त संयम सचदेवा को उत्तराखंड से गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जांच में युवराज की हत्या का कारण पैसे का लेने-देन बताया जा रहा है। हालांकि युवती बार-बार अपने बयान बदल रही है। पुलिस ने दोनों को बृहस्पतिवार को अदालत में पेश कर 5 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है।
युवराज सिंह मनचंदा हत्याकांड के आरोपी गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस उपायुक्त विनीत कुमार ने बताया कि युवराज के गायब होने की शिकायत सरिता विहार, दिल्ली में रहने वाली उसकी बहन हरसिमरन मनचंदा 11 सितंबर को लाजपत नगर थाने में दर्ज कराई थी। पीड़ित बहन ने कहा था कि छह सितंबर को अपने भाई के साथ सेंट्रल मार्केट, लाजपत नगर व गोल्डन ड्रैगन रेस्टोरेंट, के-ब्लॉक, लाजपत नगर-दो गई थी।
शाम लगभग 4:00 बजे, युवराज यह कहकर रेस्टोरेंट से चले गए कि उनकी गुरुग्राम में पूर्व ऑफिस सहयोगी अन्या वत्स के साथ एक मीटिंग है। रात 10 बजे तक तक युवराज नहीं लौटे। उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला। लाजपत नगर थाना पुलिस को जांच में पता लगा कि युवराज ने आखिरी बार अपनी पूर्व ऑफिस सहयोगी अन्या वत्स से बात की थी।
जांच में अन्या वत्स के एक नए मोबाइल नंबर का पता चला। जांच के बाद से उसके साथी संयम सचदेवा के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी युवती ने बताया कि उसने युवराज की हत्या अपनी क्रेटा कार में दो गोली गर्दन में मारकर की है। हालांकि इसका पुलिस गुरुग्राम से पता लगा रहा है।
आरोपियों ने बताया कि युवराज के शव को गुरुग्राम में फेंक दिया था। इसके बाद पुलिस को पता लगा कि 10 सितंबर को गुरुग्राम के बादशाहपुर पुलिस स्टेशन ने अपने इलाके में एक नाले से एक अज्ञात लाश बरामद की थी। मृतक की तस्वीरों से बहन ने युवराज के रूप में पहचान की थी। तस्वीरों में दिख रहे कपड़ों और शारीरिक हुलिए से भी इस पहचान की पुष्टि हुई।
गुरुग्राम में 11 सितंबर को सीवर से बरामद हुआ था शव
युवराज का शव बादशाहपुर थाना इलाके में 11 सितंबर को सीवर में सड़ी गली हालत में मिला था। शव को तीन दिन तक पहचान के लिए रखवाया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी कर पहचान न होने पर 14 सितंबर को पोस्टमार्टम के बाद शव का पुलिस ने अंतिम संस्कार करा दिया था।