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Delhi: एसआरसीसी में युगांतर 2025 का आगाज, बिजनेस और प्रबंधन के गुर सीख रहे छात्र

Fri, 28 Feb 2025 08:10 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) में युगांतर-जैत्र 2025 कार्यक्रम का आयोजन एसआरसीसी के ग्लोबल बिजनेस ऑपरेशन विभाग की तरफ से किया गया है। 'वैश्विक दृष्टि, स्थानीय प्रभाव: कल के लिए व्यवसाय को नया स्वरूप देना' विषय पर आयोजित कार्यक्रम में अमर उजाला एक्सीलेंस पार्टनर है।
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एसआरसीसी में आयोजित युगांतर 2025 कॉन्क्लेव में संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि आईएएस अधिकारी सोनल गोयल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आईएएस अधिकारी सोनल गोयल का मानना है कि छात्र विफलता से ही जीवन में सीखते हैं। छात्रों को अपना लक्ष्य स्पष्ट रखना चाहिए। इसके साथ इसे हासिल करने की लगातार कोशिश भी करनी चाहिए।  सोनल गोयल बृहस्पतिवार को श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) में युगांतर-जैत्र 2025 कार्यक्रम के उद्घाटन के मौके पर बोल रहीं थी।

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इसका आयोजन एसआरसीसी के ग्लोबल बिजनेस ऑपरेशन विभाग की तरफ से किया गया है। 'वैश्विक दृष्टि, स्थानीय प्रभाव: कल के लिए व्यवसाय को नया स्वरूप देना' विषय पर आयोजित कार्यक्रम में अमर उजाला एक्सीलेंस पार्टनर है। पांच दिवसीय कार्यक्रम में तीन दिन प्रबंधन कॉन्क्लेव और दो दिन खेल महोत्सव चलेगा। इसमें छात्रों को बिजनेस प्रबंधन के गुर सिखाए जाएंगे।

प्रबंधन कॉन्क्लेव में पहले दिन मुख्य अतिथि के तौर पर बोलते हुए सोनल गोयल ने कहा कि जीवन में दूरदर्शिता, लक्ष्य, योजना और काम के आधार पर सफलता प्राप्त की जा सकती है। पहले प्रयास में उनको भी सिविल सर्विस में सफलता नहीं मिली थी। साक्षात्कार के दौरान जब यह बताया कि एसआरसीसी की छात्रा रही हूं तो हर कोई आश्चर्यचकित हुआ था। खैर, महिलाओं की भागीदारी उद्यमशीलता और बोर्ड रूम में बढ़नी चाहिए।
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डिजिटल प्रयासों की वैश्वक स्तर पर प्रशंसा
भारत सरकार के डिजिटल प्रयासों की वैश्विक स्तर पर प्रशंसा हो रही है। यूपीआई इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। भारत वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है। नेतृत्व करने के लिए कोई खास टूलकिट नहीं होती है। हम खुद कैसे क्षमताओं, लक्ष्य और दूरदर्शिता को पहचानते यह जरूरी है। कार्यक्रम का आयोजन एसआरसीसी की जनसंपर्क सेल की ओर से किया जा रहा है। एसआरसीसी की प्रधानाचार्य सिमरत कौर ने कहा कि 1960-70 के दशक में चीजों की बहुत किल्लत रहती थी। उद्योग खत्म होने के कगार पर थे। फिर 1990 के बाद वैश्वीकरण का दौर आया। अब परिवर्तन में भौगोलिक स्थिति मायने नहीं रखती है। उत्पादन का स्तर बनाए रखने के लिए तकनीक को भी जरूर अपनाना चाहिए। 

छात्रों ने एआई के बारे में जाना
ग्लोबल बिजनेस ऑपरेशन की समन्वयक डॉ. मीशा गोविल ने कहा कि थ्योरी और प्रैक्टिकल के बीच में संयोजन होना बहुत जरूरी है। वहीं, महात्मजी टेक्निकल के संस्थापक अमरेश भारती ने कंटेट क्रिएटर बनने को लेकर छात्रों को सुझाव दिए।  इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कैसे इस्तेमाल करें उसको लेकर भी छात्रों को जानकारी दी गई।

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