एक परिषदीय स्कूल का छात्र पिछले एक महीने से रोज घर से स्कूल के लिए निकलता था, लेकिन पार्क में जाकर बैठ जाता था। अभिभावक को लगता था कि बच्चा स्कूल गया है और स्कूल शिक्षक सोच रहे थे कि बच्चा किसी वजह से स्कूल नहीं आ रहा। हाल में परिषदीय स्कूल में पायलट प्रोजेक्ट के तहत एप से अभिभावकों को जोड़ने के बाद बच्चे की हरकत सामने आ गई। जिसके बाद छात्र की काउंसलिंग की गई। अब छात्र रोज स्कूल आ रहा है।
जिले में पायलेट प्रोजेक्ट के तहत एप के माध्यम से जिले के परिषदीय स्कूलों में पढ़ाई करने वाले बच्चों के अभिभावकों को जोड़ा जा रहा है। एप की मदद से मैसेज भेजकर अभिभावकों को बच्चों के स्कूल आने, होमवर्क, बच्चे की परफॉर्मेंस जैसी जानकारी दी जा रही है। जिले में 471 प्राइमरी और 214 जूनियर हाई स्कूल है। इसमें करीब 82 हजार बच्चे पढ़ते हैं। पायलट प्रोजेक्ट से स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति में बहुत सुधार आया है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी बाल मुकुंद प्रसाद ने बताया कि बच्चा पिछले एक महीने से स्कूल में नहीं आ रहा था। हाल में मोबाइल एप के जरिये अभिभावकों के फोन पर इसका मैसेज भेजा गया। जब दो दिन बच्चे के स्कूल में न आने का मैसेज गया तो अभिभावक स्कूल आए। तब अभिभावक को बताया गया कि उनका बच्चा एक महीने से स्कूल नहीं आ रहा है। वहीं अभिभावक ने कहा कि उनका बेटा रोज घर से स्कूल जाने को बोलकर निकलता था। बच्चे से बात की गई और काउंसलिंग के जरिए उसको समझाया गया। ऐसे सभी बच्चों पर नजर रखी जा रही है।
ऐसे काम करेगा एप
एनजीओ के साथ मिलकर शिक्षा व्यवस्था के लिए जुबिलिएंट नामक एप बनाया गया है। बच्चे के स्कूल पहुंचने के साथ ही शिक्षकों को उस एप में बच्चे की उपस्थिति दर्ज करनी होती है। जिसके बाद बच्चे की उपस्थिति का मैसेज अभिभावकों के रजिस्टर्ड मोबाइल तक अपने आप पहुंच जाता है। अगर बच्चा अनुपस्थित रहता है तो इसका संदेश भी जाता है। इससे गौतमबुृद्ध नगर के सभी प्राइमरी और जूनियर हाई स्कूलों के बच्चों को जोड़ा गया है।