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तिहाड़ में जैमर के पास ही होती है मोबाइल कॉल

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नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने तिहाड़ और रोहिणी जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। करोड़ों रुपये खर्च करके जेलों में मोबाइल जैमर लगाए गए लेकिन जैमर के पास से ही मोबाइल पर बात हो जाती है।
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सीसीटीवी कैमरे लगाए गए लेकिन उसकी निगरानी तक नहीं होती। इतना ही नहीं तिहाड़ व रोहिणी जेल में क्षमता से ढाई गुना अधिक कैदी रखे गए। इसके अलावा भी सुरक्षा व्यवस्था में कई खामियों को कैग ने उजागर किया है।

कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि तिहाड़ और रोहिणी जेल में 5.81 करोड़ रुपये की लागत से 10 जेलों में 32 जैमर लगाए गए। जैमर लगाने के बाद न तो इसका परीक्षण किया गया और न ही अध्ययन किया गया कि जैमर सही तरीके से काम करता है या नहीं।
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पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो को विभाग ने बताया था कि जैमर का प्रदर्शन असंतोषजनक रहा है। इस संबंध में कई बार जेल के आसपास के रिहायशी इलाकों में रह रहे लोगों ने शिकायत की कि जैमर से जेल में बात हो पा रही है लेकिन जेल के बाहर नहीं हो पा रही है।

करोड़ों खर्च लेकिन 24 घंटे नहीं होती सीसीटीवी की निगरानी

वर्ष-2007 में 2.67 करोड़ की लागत से 258 सीसीटीवी कैमरे लगाए और वर्ष-2009 से 2015 तक 2.81 करोड़ की लागत से 233 सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्रस्ताव था, जिसका कार्य अभी भी चल रहा है।

कार्य में देरी की वजह से नौ लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। रिपोर्ट में यह भी कहा है कि 24 घंटे सीसीटीवी कैमरे की निगरानी भी नहीं हो रही है। सीसीटीवी मुख्य और उप नियंत्रण कक्ष में ज्यादातर समय निगरानी के लिए कोई कर्मचारी होता ही नहीं है।

वर्ष 1981 में मंडोली, नरेला, बपरोला और घिटोरनी में जेल निर्माण का प्रस्ताव किया गया। निधि उपलब्ध होने और 33 वर्ष की लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी भूमि अधिग्रहण में देरी अथवा भूमि अधिग्रहण न होने की वजह से निर्माणकार्य शुरू नहीं हो पाया।

मंडोली जेल के निर्माण, बनावट और जेल की आवश्यकताओं में बार-बार बदलाव के कारण अभी तक इस जेल को शुरू नहीं किया जा सका। तिहाड़ और रोहिणी जेल में कैदियों को रखने की क्षमता 6,250 है लेकिन वर्तमान में इनमें कैदियों की संख्या 14,209 है, जो क्षमता से कहीं ज्यादा है।
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आपात स्थिति से निपटने के लिए जेल अस्पताल तैयार नहीं

जेल अस्पताल आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि 18 से 62 फीसदी तक चिकित्सकों और अन्य कर्मियों की कमी है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन, एंडोस्कोपी, ईको कार्डियोग्राफ, सूक्ष्म प्राणी विज्ञान एवं रोग विज्ञान प्रयोगशाला, शल्य चिकित्सक और ऑपरेशन कक्ष की सुविधाओं का अभाव है। वर्ष-2009-14 से जेल से 93,224 बार कैदियों को इलाज के लिए बाहर के अस्पतालों में रेफर किया गया।

तिहाड़ जेल से दो कैदी फरार होने के पूरे प्रकरण की जांच के लिए दिल्ली सरकार ने मजिस्ट्रेट नियुक्त कर दिया है। उपराज्यपाल की तरफ से आईएएस अंकुर गर्ग का नाम और गृहमंत्री की तरफ से बीएस जगलान के नाम का प्रस्ताव था जिसमें से स्थानीय डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की ओर से बीएस जगलान के नाम को अंतिम स्वीकृति दी गई है। रिपोर्ट सात दिन में जमा करने के आदेश दिए गए हैं।

अतिरिक्त गृह सचिव द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि तिहाड़ जेल की सुरक्षा में सेंध लगाकर दो कैदियों के भागने के मामले की जांच बीएस जगलान करेंगे। उसमें भागने के समय हालात, सुरक्षा की पूरी योजना की समीक्षा, कैदियों के भागने में जेल स्टाफ की मिलीभगत एंगल, जिम्मेदार अधिकारी की पहचान और जिम्मेदारी तय करने, सुरक्षा के उपाय और कुछ अन्य अगर बता सकें तो वह भी सुझाएंगे। सूत्र बताते हैं कि नियम कानून पर अंतिम चर्चा के बाद एलजी की तरफ से सुझाए गए नाम की बजाय गृहमंत्री की तरफ से प्रस्तावित नाम को अंतिम स्वीकृति दी गई है।
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