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एसआईआर को लेकर योगेंद्र यादव का आरोप: 'चुनाव आयोग ने झूठ का पुलिंदा पेश किया', विश्वसनीयता पर उठाए सवाल

Thu, 29 Oct 2026 10:11 PM IST
Akash Dubey एजेंसी, दिल्ली
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योगेंद्र यादव। - फोटो : अमर उजाला
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राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने भारत निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला किया है। उन्होंने आयोग पर उच्चतम न्यायालय में "झूठ का पुलिंदा" पेश करने का आरोप लगाया। यह आरोप मतदाता सूची संशोधन से संबंधित है। यादव ने कहा कि जब तक आयोग सात महत्वपूर्ण सवालों के पारदर्शी जवाब नहीं देता, "वोट चोरी" के आरोप बने रहेंगे।

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यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए आयोग के जवाब की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों से आयोग के खिलाफ सवाल उठ रहे हैं। इसके जवाब में आयोग ने उच्चतम न्यायालय में यह "झूठ का पुलिंदा" दाखिल किया है। यादव ने निर्वाचन आयोग से सात सवाल पूछने की बात कही। उन्होंने पहले तीन सवालों में संस्थागत पारदर्शिता की मांग की। ये सवाल निर्णय लेने, प्रक्रियात्मक संशोधनों और चुनावी पंजीकरण अधिकारियों के प्रशासनिक अधिकार से जुड़े थे। यादव ने पूछा कि एसआईआर पर निर्णय किस दिन, किस प्राधिकरण द्वारा और कहां लिया गया। उन्होंने इससे संबंधित दस्तावेज पेश करने को कहा। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि फॉर्म 6 में संशोधन नहीं हुआ, तो क्या इसे अतिरिक्त घोषणा के बिना दाखिल किया जा सकता था।

मतदाता सूची और अधिकारियों के अधिकार पर सवाल
यादव ने तीसरे सवाल में ईआरओ के अधिकार छीनने का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि ईआरओ के अधिकार नहीं छीने गए, तो गोवा और महाराष्ट्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बार-बार यह शक्ति देने का अनुरोध क्यों कर रहे थे। उन्होंने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची प्रविष्टियों के प्रबंधन पर चिंता जताई। यादव ने पूछा कि बंगाल में 16 लाख आवेदन एक ही मिनट में कैसे दाखिल हुए। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि इन आवेदनों पर मिनटों में निर्णय कैसे लिए गए।
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यादव ने तार्किक विसंगति के लिए उपयोग किए जाने वाले सॉफ्टवेयर पर भी सवाल किए। उन्होंने पूछा कि निर्णय कौन लेता है और नोटिस कौन जारी करता है। नोटिस पर निर्णय लेने के लिए एसओपी क्या है, यह भी पूछा गया। यादव ने थोक में मतदाता नाम हटाने और पते में बदलाव पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने पूछा कि फॉर्म 7 थोक में कैसे दाखिल किया गया। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि किस कानून के तहत सरकारी अधिकारी फॉर्म 7 जमा कर सकते हैं।

राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा
यादव ने पीलीभीत में थोक में दाखिल किए गए फॉर्म 8 की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि यह पूरे देश में हो सकता है। यादव ने चेतावनी दी कि जब तक इन सात सवालों के जवाब नहीं मिलते, "वोट चोरी" का सवाल बना रहेगा। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास दांव पर है। यादव ने बताया कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली होगी। इस रैली में इंडिया ब्लॉक, युवा संगठन, नागरिक समाज और सीजेपी जैसे विभिन्न मंच एकजुट हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह एक राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन है।

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