दिल्ली विधानसभा चुनावों में जीत के बाद बृहस्पतिवार को आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पहली बैठक हुई। इस बैठक में जो कुछ हुआ उससे ये साफ होता है कि आम आदमी पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है।
पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए पार्टी ने प्रस्ताव पारित करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पार्टी की राजनीतिक मामलों से जुड़ी कमिटी को दोबारा बनाने का अधिकार दिया है।
इस बैठक की सबसे बड़ी बात है कि यह बहुत ज्यादा संभावना है कि जब राजनीतिक मामलों की कमिटी दोबारा बनेगी तो इसमें आप के वरिष्ठ नेता योगेंद्र यादव को कोई जगह नहीं मिलेगी।
क्यों योगेंद्र से नाराज है कार्यकारिणी
सूत्रों के अनुसार बृहस्पतिवार को हुई पार्टी की बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के एक तबके और योगेंद्र यादव में उनकी दिल्ली से बाहर हो रही गतिविधियों को लेकर जोरदार बहस हुई।
यादव पर जो प्रश्न उठाए गए उनमें चुनाव के दौरान प्रत्याशियों के चयन में अपनाया गया पक्षपातपूर्ण रवैया और दूसरा उनका दिल्ली से बाहर चुनाव लड़ने वाले बयान।
एक वरिष्ठ पार्टी कार्यकर्ता का कहना है कि कार्यकारिणी की शुक्रवार को हुई दूसरी बैठक में योगेंद्र यादव शामिल नहीं हुए थे। इसी बैठक के दौरान केजरीवाल को यह शक्तियां दी गईं कि वह पीएसी को दोबारा बनाएं। जब यादव से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने पार्टी के आंतरिक मामलों के बारे में मीडिया में बोलने से इंकार कर दिया।
केजरीवाल ने क्यों दिया इस्तीफा
सूत्रों के अनुसार बृहस्पतिवार को जब केजरीवाल पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नहीं आए और राष्ट्रीय संयोजक के पद से इस्तीफे का पत्र भेज दिया तो बैठक में खलबली मच गई।
केजरीवाल के इस्तीफे से मचे हड़कंप के बाद कार्यकारिणी ने केजरीवाल का इस्तीफा अस्वीकार कर दिया। बाद में केजरीवाल को फोन करके बताया गया कि कार्यकारिणी ने उनका इस्तीफा अस्वीकार कर दिया है।
शुक्रवार को कार्यकारिणी की दूसरी बैठक हुई तो सदस्यों ने मिलकर केजरीवाल को यह हक दिया कि वह पीएसी को दोबारा बनाएं।
एक खत जिसने पैदा किए मतभेद
राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इल्यास आजमी ने इस बात की पुष्टि की है कि केजरीवाल ने बृहस्पतिवार की सुबह पार्टी के संयोजक पद से अपना इस्तीफा भेजा था।
इल्यास के अनुसार केजरीवाल ने दिल्ली को अपनी प्राथमिकता बताते हुए राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से इस्तीफे की पेशकश की थी। हालांकि उनका इस्तीफा एकमत से अस्वीकार कर दिया गया।
इल्यास ने ये भी बताया कि पार्टी पीएसी का दोबारा गठन करने की सोच रही है। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि जब से योगेंद्र यादव ने पार्टी के अंदर डेमोक्रेसी और केजरीवाल के काम के तरीके को लेकर पत्र लिखा है तब से उनके और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच में विश्वास का अभाव देखा गया है।