मानसून में उफनती यमुना नदी दिल्ली से लेकर प्रयागराज तक बाढ़ में 2014 वर्ग किमी से ज्यादा जमीन को पानी में डुबा चुकी है। यमुना के दोनों किनारों पर बाढ़ का पानी तटबंध तोड़कर 11 किमी तक पहुंचता रहा है। केंद्रीय जल आयोग ने यमुना नदी में पिछले 100 साल में आई बाढ़ का अध्ययन किया तो यह खुलासा सामने आया।
डूब क्षेत्र पर एक याचिका के तहत एनजीटी के आदेश पर केंद्रीय जल आयोग ने यह अध्ययन कराया था, जिसमें फरीदाबाद, पलवल, नोएडा, मथुरा और आगरा में बाढ़ का असर ज्यादा पाया गया, जबकि दक्षिण पूर्वी दिल्ली में बाढ़ सबसे कम क्षेत्र को प्रभावित कर सकी। एनजीटी में पर्यावरणविद् डॉ. शरद गुप्ता की याचिका में केंद्रीय जल आयोग को 100 साल में आई बाढ़ का क्षेत्र तय करने को कहा गया था।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट एनजीटी में दाखिल की। जिसमें 5, 25 और 100 साल के आधार पर यमुना नदी की बाढ़ का क्षेत्र तय करके बताया गया। इस अध्ययन में विशेषज्ञों ने हर जिले में यमुना नदी अपने दोनों किनारों पर कितने आगे तक पानी ले गई, इसका ब्योरा दिया है।
गौतम बुद्ध नगर में यमुना नदी बाढ़ में बांयी ओर 4.34 किमी तक तो दांयी ओर 2.29 किमी तक का हिस्सा डुबा चुकी है। इसी तरह फरीदाबाद में बांयी ओर 4.33 किमी तो दांयी ओर 5.99 किमी तक की जमीन बाढ़ में डूब चुकी है। यही यमुना का डूब क्षेत्र है, जिसमें अब बहुमंजिला इमारतें, फार्म हाउस और कॉलोनियां बन चुकी हैं।
पलवल में सबसे ज्यादा बांयी ओर 8.80 किमी तक बाढ़ का पानी घुसा तो दांयी ओर 2.72 किमी तक का हिस्सा डूब चुका है। दक्षिण पूर्वी दिल्ली में यमुना नदी दांयी ओर का किनारा तोड़कर 1.56 किमी तक पानी में डुबा चुकी है। यमुना नदी हमीरपुर में 8.92 किमी की दूरी तक बाढ़ का पानी पहुंचा चुकी है। इसी तरह बांदा में 7 किमी, इटावा में 8 किमी, आगरा में 8 किमी और मथुरा में 8.50 किमी का हिस्सा डुबो चुकी है।
11 किमी तक तोड़े तटबंध, दोनों किनारे हुआ नदी का फैलाव
यमुना नदी की 100 साल की बाढ़ के अध्ययन से स्पष्ट है कि नदी का पानी कितनी दूरी तक जा चुका है, फिर भी इस क्षेत्र में इमारतें और कॉलोनियां बसाई जा रही हैं। ऐसे में हर बार बाढ़ की मुश्किलें लोगों को झेलनी हाेंगी। सरकारी एजेंसियां इस रिपोर्ट का संज्ञान लेकर यमुना किनारे के डूब क्षेत्र में इमारतों का निर्माण न होने दें। इससे लाखों लोग परेशानी से बचेंगे, जनहानि, धनहानि बचेगी। - डाॅ. शरद गुप्ता, याचिकाकर्ता
रिमोट सेंसिंग सेंटर के साथ अध्ययन
एनजीटी के आदेश पर यमुना नदी का डूब क्षेत्र तय करने के लिए 100 साल में आई बाढ़ का अध्ययन 6 संस्थानों ने मिलकर किया। इनमें नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच), गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग (जीएफसीसी), राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), डीओडब्ल्यूआर और केंद्रीय जल आयोग के अधिकारियों ने वर्ष 1924, 1978 की बाढ़ समेत हर दशक में असगरपुर से इटावा तक और शाहपुर से प्रयागराज तक यमुना के दोनों किनारों पर बाढ़ के फैलाव का अध्ययन किया। 17 जिलों से निकल रही यमुना नदी के 1056 किमी लंबे स्ट्रेच में 5, 25 और 100 साल में आई बाढ़ में सेटेलाइट इमेज की मदद से डूबी जमीन का क्षेत्र तैयार किया गया।