जेवर में प्रस्तावित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने के साथ ही यमुना एक्सप्रेसवे भी आठ लेन का बनेगा। एयरपोर्ट बनने पर वाहनों के दबाव को झेलने के लिए यह प्लान बना है। फिलहाल, यह एक्सप्रेसवे छह लेन का है।
यीडा के मुताबिक, एयरपोर्ट बनने के शुरुआती वर्षों में रोजाना 50 लाख यात्री सफर करेंगे। दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों से एयरपोर्ट तक पहुंचने का मुख्य रास्ता यमुना एक्सप्रेसवे ही है। उस दौरान एक्सप्रेसवे पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ जाएगा। इससे निजात पाने के लिए छह लेन को आठ लेन का करना जरूरी है। 2022-23 में इस एयरपोर्ट से उड़ान का लक्ष्य है। उसी अवधि में एक्सप्रेसवे का भी चौड़ीकरण किया जाएगा, ताकि दोनों साथ-साथ बनकर तैयार हो सके।
इस एक्सप्रेसवे को बनाने के लिए जेपी कंपनी के साथ अनुबंध में भी इस बात का जिक्र है कि जैसे ही यमुना एक्सप्रेसवे पर वाहनों की संख्या प्रतिदिन 60 हजार से अधिक हो जाएगी। वैसे ही इसे आठ लेन का बनाया जाएगा। इसे बनाने का खर्च कंपनी वहन करेगी। यीडा के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह का कहना है कि फिलहाल इस एक्सप्रेसवे से वर्तमान समय में 38 से 40 हजार वाहन रोजाना गुजरते हैं। अगले तीन से चार साल में इस पर वैसे ही 60 हजार वाहन गुजरने लगेंगे। उस समय इसे आठ लेन का बनाने की जरूरत होगी।
54 फीसदी यात्री खुद के वाहन से जाते हैं एयरपोर्ट
आईजीआई एयरपोर्ट का हवाला देते हुए यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली एयरपोर्ट से रोजाना सफर करने वाले कुल यात्रियों में से 54 फीसदी खुद के वाहन से पहुंचते हैं। 15 प्रतिशत सार्वजनिक वाहन का इस्तेमाल करते हैं और बाकी 31 प्रतिशत यात्री टैक्सी से सफर करते हैं। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि यमुना एक्सप्रेसवे पर कितना लोड बढ़ने वाला है।