कोर्ट ने उसके खिलाफ 50 बार गैर जमानती वारंट जारी किया था। अदालत ने 29 अप्रैल 2016 को इस मामले का संज्ञान लिया था। यादव सिंह की 50 लाख रुपये की काली कमाई को सफेद करने में सहायता करने के आरोप में सीबीआई ने कुसुमलता को भी अभियुक्त बनाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने सात सितंबर को अर्जी पर सुनवाई करते हुए कुसुमलता को आदेश दिया था कि वह दो सप्ताह के भीतर सीबीआई कोर्ट में पेश हो। उसके बाद कुसुमलता को कोर्ट में सरेंडर करना पड़ा। खराब सेहत के नाम पर दी गई कुसुमलता की जमानत अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया।