यादव सिंह के सारे जतन बेकार चले गए। जिस-जिस दर पर उन्होंने मदद मांगी, सभी ने मुंह मोड़ लिया। आखिरकार बुधवार को सीबीआई का शिकंजा कस ही गया।
बात उठ रही है कि अब अगला निशाना कौन होगा, निश्चित माना जा रहा है कि यादव सिंह के साथ पर्दे के पीछे काम करने वाली जोड़ी ‘पंडितजी और भाई साहब’ पर सीबीआई का अगला निशाना पक्का है।
जिस तरीके से सीबीआई चुन-चुनकर एक-एक को उठा रही है, उससे तय है कि यह मुद्दा आगामी विधानसभा चुनाव में प्रमुख रूप से छाने की उम्मीद है।
दरअसल, प्राधिकरण में अब तक के सबसे बड़े घोटाले का पर्दाफाश करने में सीबीआई जांच कर रही है। भले ही एक साल जांच एजेंसी को गिरफ्तारी में लग गया हो, लेकिन अब यादव सिंह की बर्खास्तगी भी हो सकती है।
पर्दे के पीछे तो कोडवर्ड में पंडितजी और भाईसाहब ही थे
सूत्र बताते हैं कि करीब एक साल के दौरान यादव सिंह ने राजनीतिक आकाओं के दर पर मत्था टेका, लेकिन हर जगह निराशा लगी। सीबीआई से बचने के लिए यादव सिंह ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
यादव सिंह तो सिर्फ मोहरा थे। पर्दे के पीछे तो कोडवर्ड में पंडितजी और भाईसाहब ही थे। उन्हीं के इशारों पर यादव सिंह काम किया करते थे।
सूत्र बताते हैं कि सीबीआई द्वारा पूछताछ के दौरान दोनों नाम यादव सिंह ने कबूले हैं। किसके पास कितनी अकूत संपत्ति है और कैसे खरीदी गई, यह भी यादव सिंह ने खोल दिया है।
यादव सिंह को किसी ने न तो घर में घुसते देखा और न निकलते
यह रहस्य कम नहीं है कि यादव सिंह सोशल मीडिया से दूर रहे। एक या दो फोटो ही सुर्खियों में रहीं। इसके अलावा एक साल तक सीबीआई ने समय-समय पर पूछताछ भी जारी रखी।
यादव सिंह को किसी ने न तो घर में घुसते देखा और न ही निकलते। कहीं कोई देख न ले, इसलिए छिपते-छिपाते उन्होंने एक साल गुजारा।
यादव सिंह की पावर के कारण ही आईएएस अधिकारी उनके दरबार में हाजिरी लगाने जाते थे। जो कह दिया वही, प्राधिकरण में कानून बन जाता था।
किस नेता को टिकट लेना है, तय करने में यादव सिंह का भी हाथ रहता था। सूत्र बताते हैं कि यादव सिंह का इरादा था कि पहले पैसे कमा लो, इसके बाद नेता बनेंगे, लेकिन वक्त को कुछ और ही मंजूर था।