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... तो 60 फीसदी मतदाता नहीं डाल पाएंगे वोट!

Wed, 12 Feb 2014 10:18 PM IST
अमित कुमार/ अमर उजाला, गुड़गांव
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गुड़गांव में मतदाता पहचान पत्र बनवाने में भारी लापरवाही बरती जा रही है। इससे वाजिब लोगों के भी मतदाता सूची में नाम नहीं जुड़ते। चिंताजनक पहलू यह है कि चुनाव निर्वाचन आयोग भी अपनी कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं ला पा रहा है।
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डीएलएफ फेज टू में रहने वाले राधेश्याम परिवार ने छह मतदाता कार्ड बनने के लिए दिए थे। करीब पांच महीने बाद मतदाता कार्ड बनकर आ गए हैं, लेकिन सभी में त्रुटियां हैं। राधेश्याम बताते हैं कि उसके नाम में ई की जगह ए लिखा गया है, वहीं बेटे की जन्मतिथि गलत चस्पा कर दी गई है।

गुड़गांव सिटीजंस काउंसिल के प्रधान आरएस राठी ने बताया कि यह केवल राधेश्याम परिवार की ही परेशानी नहीं है। जिले में 60 फीसदी मतदाताओं के साथ ऐसा हो रहा है। सितंबर से अक्तूबर 2012 के बीच काउंसिल की तरफ से 2118 मतदाता कार्ड बनाने के लिए आवेदन भेजे गए थे।
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इसमें से 20 फीसदी मतदाता कार्ड बने ही नहीं और शेष 80 फीसदी में से 60 फीसदी मतदाता कार्ड में त्रुटियां पाई गईं। इन त्रुटियों के सामने आने पर काउंसिल ने 16 नवंबर 2013 को इसकी शिकायत चुनाव निर्वाचन आयोग से भी की थी। इसके बावजूद आज तक कोई जवाब नहीं आया है।

त्रुटि सुधारने की प्रक्रिया भी बोझिल
जाफरा के प्रधान कर्नल रतन सिंह का कहना है कि मतदाता कार्ड की त्रुटि सुधारने की प्रक्रिया भी बोझिल है। इसके लिए पहले चुनाव कार्यालय जाना पड़ता है। उसके बाद साइबर कैफे जाकर 100 रुपये की चालान फीस भरनी पड़ती है। बैंक जाकर दोबारा शुल्क भरना पड़ता है। इसके बाद भी गारंटी नहीं कि मतदाता कार्ड की त्रुटि दूर हो जाए। उन्होंने बताया कि अव्वल तो लोग मतदाता कार्ड बनवाने के लिए गंभीर नहीं होते। समझाने पर कोई तैयार हो तो इन त्रुटियों की वजह से पीछे हट जाता है।

चुनाव आयोग कार्यालय की हालत भी खराब
चुनाव कार्यालय की हालत भी बेहद खराब है। यहां न तो स्टाफ है और न ही कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य संसाधन। आरटीआई से पता चला कि तहसीलदार ने चार साल पहले चुनाव कार्यालय के लिए फर्नीचर की मांग की थी, लेकिन यह मांग अभी तक अधूरी है। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों ने यह मुद्दा हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्रीकांत वालगद के समक्ष सात दिसंबर 2013 को हुई बैठक में भी उठाया था। इसके बावजूद कोई सुधार सामने नहीं आया है।
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