विशेषज्ञों का कहना है कि लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, एम्स सहित दूसरे अस्पताल के स्त्री एवं प्रस्तुति रोग विभाग में इलाज के लिए आईं महिलाओं का विश्लेषण करने में यह बातें सामने आई हैं। थायराइड ग्रंथि हार्मोन का उत्पादन करती है जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करते हैं। महिलाओं में हार्मोनल परिवर्तनों के कारण थायराइड असंतुलन की आशंका अधिक होती है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि किसी महिलाओं में इसके लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत इलाज करना चाहिए। इसका इलाज लंबे समय तक चलता है।
आयोडीन में कमी थायराइड के लिए एक बड़ा कारण है। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार बड़े स्तर पर अभियान चला रही है। पुरुषों के मुकाबले यह रोग महिलाओं में ज्यादा होता है। 20 से 40 साल की उम्र की महिलाओं में यह रोग होने की आशंका अधिक रहती है। -प्रोफेसर डॉ. पिंकी सक्सेना, निदेशक स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, लेडी हार्डिंगे मेडिकल कॉलेज
साल में एक बार करवाए जांच
एम्स के डॉक्टर को कहना है कि यदि किसी में थायराइड के लक्षण दिखते हैं तो उन्हें साल में एक बार जरूर जांच करवाना चाहिए। यदि थायराइड का स्तर सामान्य भी पाया जाता है तब भी बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद नहीं की करनी चाहिए।