बात करते समय अचानक मुंह डेढ़ा हो जाए, बोलने में कठिनाई हो, हाथ न उठे, संतुलन बिगड़ जाए तो सावधान हो जाना चाहिए। यह ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखने पर बी-फास्ट का पालन करते हुए मरीज को तुरंत अस्पताल लाना चाहिए।
एम्स में हर दिन आ रहे 500 मरीज
एम्स के न्यूरोलाजी विभाग की प्रोफेसर डा. मंजरी त्रिपाठी ने बताया कि एम्स में हर दिन करीब पांच ऐसे मरीज आते हैं। हर तीन से चार मिनट में एक को ब्रेन स्ट्रोक आता है। यहां कुछ जांच के बाद उपचार शुरू कर दिया जाता है। ऐसे मामलों में मरीज जितनी देरी से आएगा, उसको लकवा होने की संभावना बढ़ जाएगी।
बदल रहा ट्रेंड
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. ज्योति गर्ग ने बताया कि पहले ब्रेन स्ट्रोक 60 की उम्र के बाद देखने को मिलता था, लेकिन अब 20 से 30 की उम्र के नौजवान भी इसका शिकार हो रहे हैं। हालांकि इसका कारण क्या है, यह अध्ययन के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। सर्दियों में ब्रेन स्ट्रोक के केस ज्यादा आते हैं। आरएमएल के औसत आंकड़े 4-5 मामले प्रतिदिन हैं। साढ़े चार घंटे के अंदर अस्पताल में सीटी स्कैन के बाद उपचार देने से लकवे में सुधार की संभावना बढ़ जाती है।