8 सितम्बर विश्व में वर्ल्ड फीजिओथेरेपी डे के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। फीजिओथेरेपी मेडिकल साइंस की ऐसी प्रणाली है जिसकी सहायता से जटिल रोगो का इलाज संभव होता है।
भारत में इसके प्रति जागरूकता कम होने से बहुत कम लोग इसका फायदा ले पाते हैं। फीजिओथेरेपी में जहाँ एक ओर ऑस्टिओ अथराइटिस (गठिया) और स्पाइनल इंजरी जैसी जटिल बीमारियों का इलाज है वहीं किसी भी प्रकार का साइड इफ्फेक्ट ना होना इसको आकर्षक बनाता है।
वर्ल्ड फीजिओथेरेपी डे के उपलक्ष्य में के० आर० वी० हेल्थकेयर एंड फीजिओथेरेपी की संस्थापक और प्रबंध निदेशक डॉ० रिदवाना सनम का कहना है ही भारत में फीजिओथेरेपी को ले कर लोगो में जागरूकता की कमी है।
दुनिया के लगभग 26% वयस्क पूर्ण रूप से सक्षम नहीं है। हमारी जीवन शैली दिन प्रति दिन तेज होती जा रही है। जिसके लिए हमें आसान और कारगर विधि का प्रयोग जरूरी है।
उनका कहना है की हम योग को प्राथमिक चिकित्सा की श्रेणी में ला रहे है जब की फीजिओथेरेपी योग का ही शुद्ध रूप है। फीजिओथेरेपी में हम मरीज की मांशपेशियों की गतिविधि समझ उसका इलाज करते है। स्पोर्ट्स पर्सन, सीनियर सिटिज़न और बड़ी चोट का इलाज इस विधि द्वारा बहुत आसानी से किया जाता है।
उन्होंने कहा की समय के साथ साथ लोगो का रुझान फीजिओथेरेपी की तरफ थोड़ा बढ़ा है। हम अपने सेंटर्स पर दुनिया की सबसे उत्कृट मशीनों द्वारा इलाज कर रहे है।
विगत 8 सालों में हमने 55 ,000 से अधिक सफल इलाज किये हैं और भविष्य में फीजिओथेरेपी के प्रचार प्रसार पर भी काम करते रहेंगे।
वर्ल्ड कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ फिजिकल थेरेपी ने 8 सितम्बर को वर्ल्ड फिजिओथेरेपी डे घोषित किया है। जिससे लोगो में इसके प्रति जागरूकता बढे और वर्तमान समय की जीवन शैली के अनुरूप उन्हें बिना किसी दुष्प्रभाव के इलाज संभव हो सके।