ऑस्टियोपोरोसिस शरीर में हड्डियों को कमजोर बना रहा है, जो खामोश बीमारी के नाम से जानी जाती है। इस रोग का पता तब चलता है, जब किसी वजह से हड्डी टूटने या दर्द से हड्डी की जांच करनी पड़ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ इस रोग के होने की आशंका हर व्यक्ति में होती है। लेकिन खराब जीवन शैली, युवाओं में बढ़ता धूम्रपान, मोटापा सहित दूसरे कारणों से उम्र से पहले ही लोगों में यह समस्याएं देखने को मिलने लगी है। कुछ मामलों में यह युवाओं में भी दिख रहा है।
डॉक्टरों का कहना है कि 30 साल के बाद हर व्यक्ति की हड्डियों की मजबूती में कमी आनी शुरू हो जाती है, लेकिन नियमित व्यायाम करने वाले, उचित आहार लेने वाले सहित अन्य में गिरावट की गति काफी कम होती है। ऐसे में इन लोगों में समस्या काफी देर में दिखाई देती है। जबकि बढ़ता धूम्रपान, खराब जीवन शैली, बढ़ता मोटापा 50 साल के लोगों की हड्डियों की मजबूती के लिए चुनौती बन रहा है।
सफदरजंग अस्पताल के भौतिक चिकित्सा और पुनर्वास विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. अजय गुप्ता ने कहा कि महिलाओं में 60 साल के बाद और पुरूषाें में 70 साल के बाद ऑस्टियोपोरोसिस होने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। लेकिन बदले जीवन शैली के कारण रोग होने की उम्र घट रही है। विभाग की ओपीडी में रोजाना करीब 500 मरीज इलाज करवाने आते हैं। इनमें से करीब 10 फीसदी लोगों में ऑस्टियोपोरोसिस रहता है। इस रोग के होने का कोई लक्षण नहीं दिखते। इसका पता ही फ्रैक्चर या जांच के बाद चलता है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ही हड़िडयों को कमजोर होने से रोका जाए तो लंबे समय तक इस समस्या को रोका जा सकता है।
इस हिस्से पर करता है सीधा हमला
ऑस्टियोपोरोसिस के कारण कूल्हे, जांघ और रीढ़ की हड्डी तेजी से कमजोर हो सकती है। इन जगहों की हड्डियों में खून ज्यादा रहता है। यह सबसे मजबूत हड्डी मानी जाती है। यदि यह टूटती है तो मरीज में मृत्युदर होने की आशंका भी बढ़ जाती है।
बचाव के लिए यह करें
- गिरने से बचे - घर व बाहर ऐसे व्यवस्था करें कि गिरने से बच सकें। साथ ही एक उम्र के बाद विशेष ध्यान रखें।
- गिरे तो चोट न लगे - नियमित व्यायाम करें। साथ ही कैल्शियम युक्त भोजन लें। इसकी मदद से मांसपेशियां मजबूत रहेगी। इनसे हड्डियों को कमजोर होने से रोका जा सकता है या पहले से कमजोर हड्डियों को मजबूत बनाया जा सकता है।
- हड्डी की ताकत बढ़ाए - 30 की उम्र के बाद हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर होना शुरू हो जाती है। ऐसे में एक समय के बाद नियमित जांच करवाकर हड्डी की क्षमता अनुसार डॉक्टर की सलाह पर दवा लें। साथ ही पौष्टिक आहार ले।
रोग होने के बाद लक्षण
मामूली चोट लगने पर भी हड्डियां टूटना, खासकर कूल्हे, रीढ़, और कलाई में
पीठ दर्द
झुकी हुई मुद्रा
सांस लेने में तकलीफ