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विश्व पुस्तक मेला : रविवार को हुआ समापन, इन किताबों की रही सबसे ज्यादा मांग

Mon, 15 Jan 2018 10:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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book fair - फोटो : G. pal
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प्रगति मैदान में 6 से 14 जनवरी तक नौ दिवसीय विश्व पुस्तक मेले का रविवार को समापन हुआ। छुट्टी और आखिरी दिन होने की वजह से मेले में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। विक्रेताओं ने भी पुस्तकों पर भारी छूट देकर मौके का जमकर फायदा उठाया।

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आलम यह था कि देर शाम तक यहां पाठकों का तांता लगा रहा। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास पाठकों की भीड़ से बेहद संतुष्ट है। इस आयोजन को सफल माना जा रहा है। साथ ही मेले में अंतरराष्ट्रीय भागीदार भी पाठकों के रुझान से खुश नजर आए। रविवार को बाल, युवा और बुजुर्ग सभी वर्गों के पाठकों ने यहां शिरकत की।

पाठकों के लिए हंस ध्वनि थियेटर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी दी गई। दिल्ली की पाठक ज्योति ने बताया कि उन्होंने काफी किताबें खरीदीं है और छूट से उनका काफी फायदा भी हुआ है। रविवार को ऑफिस की छुट्टी होने के कारण उन्हें मेले में आने का मौका मिला।
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राष्ट्रीय पुस्तक न्यास अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा ने बताया कि विश्व पुस्तक मेले में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों वर्ग के पाठकों ने शिरकत की। खास तौर पर साहित्यिक और इतिहास से जुड़ी पुस्तकों की खरीदारी पर ज्यादा दिलचस्पी दिखाई है। प्रगति मैदान का क्षेत्र पिछले सालों की तुलना में आधा ही था, बावजूद पाठकों की रुचि बरकरार रही। 

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छाया गजल संग्रह का जादू

book fair - फोटो : G. pal
वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि चेतन आनंद के गजल संग्रह का लोकार्पण हुआ। गजलों की पेशकश से पाठकों की भारी भीड़ एकत्रित हो गई। अनय प्रकाशन के तहत इस गजल संग्रह को प्रकाशित किया गया।

इस मौके पर सुप्रसिद्ध कवि डा कुंवर बेचैन, डॉ बुद्धिनाथ मिश्र और चर्चित व्यंगकार हरीश नवल ने ‘अल्फाज के पंछी’ गजल संग्रह का विमोचन किया। काव्य पाठ की पेशकश का पाठकों ने भी लुत्फ उठाया। कवि चेतन आनंद ने कहा कि उनकी इस कृति में जीवन के सभी रंगों को समाहित किया गया है, जिससे हर पाठक कहीं ना कहीं जुड़ा हुआ है। 

रणविजय राव की पुस्तक का विमोचन
मकर संक्रांति के मौके पर विश्व पुस्तक मेले में रणविजय राव की दो पुस्तकों अर्घ दान की बेला और जिंदगी इतनी सरल भी नहीं, का लोकार्पण हुआ। प्रकाशन वैभव प्रकाशन द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष डा. सत्यनारायण जटिया, सांसद और संसदीय राजभाषा समिति के उपाध्यक्ष, बलदेव भाई शर्मा, पद्मश्री डा. श्याम सिंह शशि, प्रख्यात साहित्यकार गिरीश पंकज और लोकसभा सचिवालय के संयुक्त सचिव वी के त्रिपाठी उपस्थित थे। 

दिखा कश्मीरी पंडित की हत्या का दर्द

book fair - फोटो : G. pal
हाल 12 -12 ए, में अयन प्रकाशन के तहत हिंदी लेखक मंच पर चर्चित कवि डा. रश्मि बजाज के काव्य संकलन ‘जुर्रत ख्वाब देखने की’ का लोकार्पण किया गया। काव्य संकलन को चार खंडों ‘कोई उन्मादी लिखता कविता’, रहेंगे जिंदा’, ‘ये वक्त न तेरे थमने का’, और ‘मैं हूं स्त्री’ में विभाजित किया गया है।

काव्य में डा रश्मि बजाज ने कश्मीरी पंडित दलित निर्दोष डा. पंकज नारंग की जघन्य हत्या की अनकही, अनसुनी पीड़ा का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि यह प्रथम बार है कि किसी संग्रह की कविताएं उस ‘दमित’ वर्ग की आवाज बनी हैं।
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हंगरी के कवि यानोश आरन्य की पुस्तक का लोकार्पण

book fair - फोटो : G. pal
विश्व पुस्तक मेले में आज का दिन हंगरी के महान कवि यानोश आरन्य के नाम रहा। साहित्य में यानोश हंगरी के शेक्सपीयर के नाम से मशहूर हैं।

हंगरी दूतावास और बलाशी इंस्टीट्यूट द्वारा हाल नंबर 7 में कवि के 200वीं जयंती के अवसर पर उनकी हिंदी में अनुवादित पुस्तक का विमोचन साहित्यकार श्री गिरधर राठी, डा. मारगित कोवैश व डा. जोल्टान वैल्हम द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

इस अवसर पर उपस्थित पुस्तक के अनुवादक सुरेश सलिल, हिमानी पाराशर और इंद्रप्रीत द्वारा उनकी कविताओं का पाठ किया गया। 
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