फरीदाबाद निवासी एक युवती की शादी कुछ साल पहले एचआईवी संक्रमित युवक से हो गई। पति के संपर्क में आने के बाद महिला भी एचआईवी पीड़ित हो गई। कुछ समय पहले महिला के पति का देहांत हो गया तो उसके साथ ऑफिस में काम करने वाले एक युवक ने समाज व परिवार के विरोध के बावजूद उस महिला से शादी की। महिला का नियमित इलाज चल रहा है, जबकि उसका पति भी समय-समय पर अपनी जांच करवाता रहता है और ठीक है। ऐसे में दोनों अपना सुखी वैवाहिक जीवन जी रहे हैं और दूसरों को भी प्रेरित कर रहे हैं।
वहम का इलाज नहीं
कविता सिंह के अनुसार पिछले करीब 10 साल से एक व्यक्ति उनके पास थोड़े-थोड़े समय में अपनी जांच करवाने आता है। उस व्यक्ति ने अपनी शादी से पहले किसी महिला के साथ संबंध बनाए थे। बाद में किसी ने उसे बताया कि महिला एचआईवी पीड़ित है। इस पर उसने अपनी जांच करवाई तो एचआईवी नेगेटिव पाया गया। उस व्यक्ति को वहम हो गया कि उसे एड्स हो गया है। उस घटना के बाद उस व्यक्ति की शादी हुई और अब दो बेटियां भी हैं। इसके बावजूद वह फिर भी परेशान रहता और अपनी जांच करवाता रहता है।
रक्त चढ़ने के तीन माह तक नहीं पता चलता वायरस का
किसी व्यक्ति को रक्त चढ़ने के तीन माह बाद तक उसे संक्रमित खून चढ़ने के बारे में पता नहीं चल पाता है। कविता सिंह ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति ने आज अपना खून किसी को दिया और वह एचआईवी संक्रमित है तो उसके बारे में पीड़ित को कम से कम तीन माह बाद पता चल सकेगा। रक्त चढ़ने के तीन माह बाद एचआईवी का वायरस सक्रिय होता है। ऐसे में संक्रमित रक्त वाले मरीजों की संख्या भी ज्यादा है।
एचआईवी के प्रति स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है। लगातार जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं। हर शनिवार को उद्योगों, स्लम, ईट भट्टों आदि में जागरूकता शिविर लगाए जाते हैं। लोगों की काउंसलिंग और जांच की जाती है। औद्योगिक नगरी होने के कारण यहां बाहर से आकर रहने वाले लोगों की संख्या ज्यादा है। इस कारण यहां आंकड़ों में भी बढ़ोतरी हुई हैं। - डा. शीला भगत, उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी (एचआईवी व टीबी विभाग)