राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) के अनुसार अक्तूबर 2015 से मार्च 2016 के बीच देश भर के राज्यों की एड्स को लेकर ग्रेडिंग की गई थी। इसमें राजधानी दिल्ली 84 अंकों के साथ छठवें स्थान पर थी जबकि शीर्ष स्थान पर महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश 155 अंकों के साथ था। नाको के अनुसार देश में हर वर्ष 400 लोगों की मौत एड्स से हो रही है। 2017 तक देश में एचआईवी ग्रस्त मरीजों की संख्या 2 लाख 465 दर्ज की गई है।
दिल्ली एड्स नियंत्रण सोसायटी के अनुसार जितनी तेजी से दिल्ली आने वालों की संख्या बढ़ रही है उतनी ही तेजी से एचआईवी/एड्स के मामले भी बढ़ रहे हैं। प्रवासी मजदूरों और कर्मचारियों के कारण मरीजों की स्थिति भयावह देखने को मिल रही है। दिल्ली सरकार के सबसे बड़े केंद्र लोकनायक अस्पताल के डॉक्टर का कहना है कि उनके यहां इलाज के लिए पहुंच रहे एचआईवी के मरीजों में कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें उपचार के दौरान बीमारी का दंश झेलना पड़ा।
एक 8 वर्षीय बच्चा झुंझनू निवासी कुछ दिन पहले ब्लड ट्रांसफ्यूजन के चलते एचआईवी ग्रस्त हुआ था। हालांकि चिकित्सीय लापरवाही की वजह से बीमारी के उदाहरण कम है। उनका मानना है कि असुरक्षित यौन संबंध और नशे की सीरिंज के कारण दिल्ली में ज्यादा एचआईवी मरीज देखने को मिल रहे हैं।