आम आदमी पार्टी के व्यापार प्रकोष्ठ के संयोजक ब्रजेश गोयल ने अमर उजाला से कहा कि मजदूरों को काम दिए बिना उन्हें रोकना संभव नहीं होगा। अब तक भारी संख्या में मजदूरों का पलायन हो चुका है। अगर उन्हें जल्दी ही काम देने की कोशिश नहीं हुई तो बाकी मजदूरों को भी जाने से रोकना संभव नहीं हो पाएगा।
यही कारण है कि वे दुकानों को ऑड-ईवन स्कीम के तहत खोलने की वकालत कर चुके हैं। व्यापारियों की राय से सरकार को भी अवगत करा दिया गया है।
बुधवार को दिल्ली के व्यापारियों के शीर्ष संगठन चैंबर्स ऑफ ट्रेडर्स एंड इंडस्ट्री (CTI) के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इसमें थोक व्यापारियों के अलावा फुटकर विक्रेताओं के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
दिल्ली कांट्रेक्ट बस एसोसिएशन के महासचिव हरीश सब्बरवाल ने अमर उजाला को बताया कि वे यूपी, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, पंजाब और लेह-लद्दाख के लिए मजदूरों को ले जाने का काम कर रहे हैं। विभिन्न राज्य सरकारों और दिल्ली सरकार में सहमति बन जाने के बाद वे अब तक 43 बसें अलग-अलग राज्यों में भेज चुके हैं।
उन्होंने बताया कि मजदूरों को सरकारों के बयान पर भरोसा नहीं हो रहा है। सरकार जगह-जगह पर भोजन देने की बात कह रही है, लेकिन ऐसे लाखों लोग हैं जिन तक राहत सामग्री नहीं पहुंच पा रही है। निकट भविष्य में उन्हें कोई काम मिल सकेगा या नहीं, इसको लेकर उनकी चिंता बनी हुई है। यही कारण है कि तमाम दावों के बाद भी वे रुक नहीं रहे हैं।
वहीं, भारतीय मजदूर संघ के दिल्ली प्रांत के अध्यक्ष अनीश मिश्रा ने कहा कि जिन मजदूरों के पास यहां स्थाई विकल्प नहीं हैं, वही पलायन की सोच रहे हैं। लेकिन दिल्ली और आसपास के इलाकों में भारी संख्या में मजदूरों ने अपने मकान बना लिये हैं। उनके लिए यह स्थान ही अपने घर जैसा बन चुका है। ऐसे में इन मजदूरों के पलायन का कोई सवाल ही नहीं होता है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने कुछ जगहों पर काम करने की शुरुआत की है। मजदूरों को यहां काम मिलने लगा है जिससे उम्मीद बनी है। आगे जैसे-जैसे उद्योग खुलने लगेंगे, बाकी मजदूर भी रुक जाएंगे और घरों को जा चुके मजदूर भी धीरे-धीरे वापसी करेंगे।