भीड़भाड़ के बीच व्यस्त सड़कों पर मेट्रो निर्माण से वाहनों के आवागमन में रुकावट नहीं होगी। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने जनकपुरी पश्चिम आर के आश्रम मार्ग कॉरिडोर पर दोहरे यू-गर्डर रखने के लिए ट्रांसपोर्टर से जुड़े खास डिजाइन के लांचर से लांचिंग की शुरुआत कर दी है।
डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक डॉ. मंगू सिंह ने वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में मजलिस पार्क के पास, निर्माण कार्य की शुरुआत की गई। अत्याधुनिक तकनीक से लैसनए लांचर से मेट्रो निर्माण की रफ्तार बढ़ने के साथ साथ वाहनों के आवागमन में भी परेशानियां दूर होंगी। कम जगह में अधिक प्रभावी होने की वजह से मेट्रो निर्माण की रफ्तार भी तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।
पिछले चरणों में निर्माण के दौरान यू-गर्डर स्थापित करने के लिए दो क्रेन की जरूरत होती थी। दिल्ली के शहरी क्षेत्र में भारी-भरकम क्रेन को खड़ा करने के लिए पर्याप्त स्थान तलाशना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। यू-गर्डरों को भी ट्रेलर से लेना जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
सड़कों पर अत्यधिक भीड़भाड़ और रात में भी भारी यातायात के कारण यू-गर्डर लगाने में दिक्कतें आ रही थी। आधुनिक लांचर बिजली से संचालित होंगे जो पारंपरिक लांचर या क्रेन की तुलना में अधिक प्रभावी हैं। ट्रांसपोर्टर एक तय स्थल से यू-गर्डरों को उठाते हैं और पहले से निर्मित यू-गर्डरों पर बिछाई गई अस्थायी पटरियों पर आगे बढ़ते हैं। नया लांचर 62 मीटर लंबा, 10.4 मीटर चौड़ा होगा।
फीडिंग प्वाइंट से लांचर तक यू-गर्डर की ढुलाई करने वाला ट्रांसपोर्टर 41.75 मीटर लंबा होगी। इसकी क्षमता 180 टन है जबकि लोड के साथ रफ्तार दो किलोमीटर प्रतिघंटा होगी। लांचर की मदद से रोजाना 4-6 यू-गर्डर लगाए जा सकेंगे जबकि फिलहाल क्षमता करीब एक तिहाई है। अभी तक यू-गर्डर ट्रेलर पर लाए जा रहे थे, लेकिन ट्रांसपोर्टर की मदद से सड़क से संपर्क के बगैर गंतव्य तक पहुंचाना संभव होगा।
9.5 किलोमीटर के निर्माण में होगा इस्तेमाल
देश में पहली बार ऐसी किसी प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जा रहा है। फिलहाल 462 यू-गर्डरों के निर्माण किया जाना है। मुकरबा चौक से अशोक विहार के बीच 9.5 कि.मी. लंबे वायाडक्ट निर्माण में लांचर का पहली बार इस्तेमाल किया गया। इस कॉरिडोर पर भलस्वा, मजलिस पार्क, आजादपुर और अशोक विहार सहित कुन चार स्टेशन होंगे।