सरकारों में तालमेल न होने से दिल्ली के ऐतिहासिक धार्मिक स्थल सूरत संवरने की राह देख रहे हैं। इसके लिए केंद्र ने दिल्ली सरकार को ‘प्रसाद’ योजना का प्रस्ताव दिया था। तीन साल बीतने के बाद भी दिल्ली सरकार ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। प्रस्ताव पर स्वीकृति मिलती तो केंद्र सरकार दिल्ली के मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा व चर्च में युवाओं, श्रद्धालुओं और विदेशी पर्यटकों को जोड़ने के आधार पर सुविधाओं में बढ़ोतरी कराने के लिए बजट पास करती।
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने देश के ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण के लिए 2018 में ‘प्रसाद’ योजना शुरू की थी। सूत्रों के अनुसार, इसमें सभी राज्य सरकारों और यूटी प्रशासन को धार्मिक स्थलों को संवारने का प्रस्ताव मांगा था। इसके बाद राज्यों ने अपने-अपने धार्मिक स्थलों को संवारने के लिए प्रस्ताव व रूपरेखा दी। दिल्ली सरकार ने तीन साल में बार-बार मंत्रालय के प्रस्ताव भेजने के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया है।
ऐतिहासिक शहर है दिल्ली
दिल्ली देश की राजधानी ही नहीं, ऐतिहासिक शहर भी है। यहां मुगल सल्तनत से लेकर अंग्रेजों के जमाने की कहानियां जुड़ी हुई हैं। दिल्ली में ऐतिहासिक व धार्मिक मान्यता से जुड़ा प्राचीन झंडेवाला मंदिर, कालकाजी मां का मंदिर, जामा मस्जिद, निजामुद्दीन दरगाह, गुरु तेग बहादुर से जुड़ा शीशगंज गुरुद्वारा, श्री बंगला साहिब गुरुद्वारा, गुरुद्वारा श्री रकाबगंज से लेकर कई चर्च भी हैं। प्रदेश सरकार यदि इनमें से किसी को भी ‘प्रसाद’ योजना के प्रस्ताव में चुनती तो पर्यटन मंत्रालय इन धार्मिक स्थलों के परिसर में सुविधाएं बढ़ाने के लिए बजट जारी करता। इसमें पार्किंग, पानी, लंगर, बैठने आदि के हॉल, सड़क, रेल व हवाई यात्रा से जोड़ने के तहत काम किया जाता है।