ताने देने वाले अब बेटियों के गा रहे गुन
गली-मोहल्ले में यदि कोई अपनी बेटी को क्रिकेट खेलने के लिए भेजता है तो सामने तो नहीं लेकिन लोग पीठ पीछे ताने जरूर देते हैं। रविवार रात भारतीय बेटियों के विश्व विजेता बनने के बाद अब ताना देने वालों के सुर बदल गए हैं। भारतीय महिला क्रिकेट जब से बीसीसीआई के अधीन गया है तब से इसके दिन बहुरने लगे। जय शाह के सचिव बनने के बाद महिला क्रिकेट के क्षेत्र में काफी काम हुआ।
मिताली, हरमन, स्मृति, जेमिमा, दीप्ती शर्मा और शैफाली वर्मा जैसे खिलाड़ियों को देखकर कई क्रिकेट प्रेमियों ने अपनी बेटियों को भी क्रिकेटर बनाने का समना देखना शुरू किया। अब राजधानी की गलियों से लेकर बदरपुर, लाजपत नगर, ग्रेटर कैलाश, और वंसत कुंज की क्रिकेट अकादमियों में सुबह-शाम क्रिकेट अकादमियों तक हर जगह लड़कियां बल्ला और गेंद लेकर मैदान में उतर रही हैं। कोच मुकुल गुप्ता हरमन की जीत के बाद इनकी संख्या में कई गुना बढ़ाेत्तरी होना तय है।
जब टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका को हराया, तो लगा जैसे हमारी भी जीत हो। अब हर प्रैक्टिस सेशन में बस एक ही ख्याल रहता है कि देश के लिए कुछ कर दिखाना है। -पुजा गुप्ता
टीम इंडिया की जीत ने हम सबको नया आत्मविश्वास दिया है। अब लगता है कि मेहनत करने से कुछ भी असंभव नहीं। - शिवानी सिंह, क्रिकेटर
हरमनप्रीत और शैफाली की बल्लेबाजी देखकर लगता है जैसे वो हम सबकी आवाज हैं। अब हम भी बनना चाहती हैं आने वाली हरमनप्रीत। - प्रज्ञा रावत, क्रिकेटर
पहले घरवाले कहते थे कि क्रिकेट तो लड़कों का खेल है, लेकिन अब वही लोग हमें बैट दिलाते हैं और कहते हैं तुम भी एक दिन भारत के लिए खेलो। -वर्षा
इस जीत के बाद यकीन हो गया कि इरादा मजबूत हो तो कोई सपना बड़ा नहीं। मम्मी-पापा सपोर्ट करते हैं लेकिन अन्य परिजनों की सोच बदल गई है। - सारा लंबा