दिल्ली में अब बनने वाले मॉल, रेस्टोरेंट, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, अस्पताल, स्कूल व अन्य सामाजिक सदनों में महिला शौचालय की संख्या में कमी नहीं होगी।
डीडीए ने अपने बिल्डिंग बायलॉज में बदलाव करने का निर्णय लिया है। इस नियम में पुरुषों के शौचालय के बराबर की संख्या में ही महिलाओं के लिए भी शौचालय का निर्माण करना अनिवार्य होगा।
डीडीए उपाध्यक्ष अरुण गोयल ने मीडिया को बताया कि पहले प्रत्येक 60 पुरुष पर सार्वजनिक शौचालयों के अनुपात में 40 महिला सार्वजनिक शौचालयों की अनुमति थी।
अब 50 पुरुषों के अनुपात में 50 महिला शौचालय बनेंगे, जहां 500 लोग इकट्ठा होते हैं वहां अब पुरुषों के लिए 4 शौचालय व 4 पेशाबघर होंगे तो महिलाओं के लिए शौचालयों की संख्या अब 11 होगी।
दुकानों/व्यावसायिक कार्यालयों में पहले 15 महिलाओं के लिए एक शौचालय निर्धारित था, अब प्रति 10 महिलाओं के लिए 1 शौचालय होगा।
आम जनता से फीडबैक के लिए बनबाया जा रहा एप
गोयल का कहना है कि डीडीए की खाली भूमि को खेल के मैदान के रूप में उपयोग किया जाएगा। खेल परिसरों तक नहीं पहुंचने वाले बच्चे वहां खेलेंगे। आबाद क्षेत्रों से जुड़ी भूमि की पहचान की जाएगी, उन्हें समतल किया जाएगा और उन पर घास उगाई जाएगी।
फेंसिंग की जाएगी, पानी का कनेक्शन और बिजली का कनेक्शन उपलब्ध किया जाएगा, कपड़े बदलने के कमरे, शौचालयों, रखरखाव शेड की सुविधा होगी। गोयल का कहना है कि जिस जगह पर कूड़ा फेंका जाता है वह अब खेल मैदान के रूप में विकसित होगा। अतिक्रमण से बचाने में बच्चे इस तरह से डीडीए की मदद भी करेंगे।
फीडबैक के लिए मोबाइल ऐप तैयार होगा। एयर कंडीशनर, लॉन, सफाई, प्रकाश व्यवस्था है या नहीं इसकी शिकायत मोबाइल ऐप पर लोग कर सकेंगे।
आम जनता के फीडबैक से सड़क की चौड़ाई, गड्ढे, निर्बाध सड़क, सड़क की पटरी की उचित गति, आसपास वाहन की उचित गति, आसपास के अनुरूप सड़क की ऊंचाई पर डीडीए जानकारी प्राप्त करेगा। आवासीय योजना के आवंटियों से ऑनलाइन फीड बैक लिया जाएगा।