फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi NCR News: स्त्री प्रणेता जनक नंदनी सीता संगोष्ठी का हुई आयोजित

सार

नई दिल्ली के मालवीय भवन में माता सीता के आदर्शों पर संगोष्ठी आयोजित हुई। वक्ताओं ने आज के समाज और परिवार में सीता के मूल्यों और शिक्षाओं को अपनाने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियों ने विचार साझा किए।
विज्ञापन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

संगोष्ठी में वक्ताओं ने माता सीता के जीवन दर्शन से सीख लेने पर दिया जोर
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। जब भी बात स्त्री के अस्तित्व या मर्यादा की आई है, तब-तब माता सीता को उदाहरणों में जगह दी गई है। मालवीय भवन में भी बृहस्पतिवार को माता सीता के आदर्शों को याद करते हुए संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय स्त्री प्रणेता जनक नंदनी सीता रखा गया। संगोष्ठी माता सीता के जीवन, आदर्शों और त्याग पर आधारित थी।
दीप प्रजापालन और सिया-वर रामचंद्र की जयघोषों के बीच कार्यक्रम शुरू हुआ। इसका उद्देश्य आज के भागते-दौड़ते जीवन में माता सीता के चरित्र, संस्कार और स्त्री चेतना की प्रासंगिकता को समझना और अपनाना रहा। बतौर मुख्य अतिथि मौजूद स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर मुख्य अतिथि रहे। वहीं, केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल और सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी दुबे ने विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने विचारों को रखा।
विज्ञापन




-



माता सीता केवल पत्नी या माता नहीं, बल्कि परिवार और राष्ट्र की संरक्षक हैं। बेटियों को रावण जैसे बहुरुपियों से सतर्क रहना चाहिए। धर्म, संस्कार व स्त्री चेतना को जीवन में अपनाने की जरूरत गै। -साध्वी समाहिता देवी



माता सीता का व्यक्तित्व और उपलब्धियां आज भी समाज और परिवार में महत्वपूर्ण हैं। उनके आदर्श हमें जीवन में अपनाने चाहिए। -पूजा देशमुख



परिवार में माता सीता के मूल्यों को अपनाना आवश्यक है। बच्चों में संस्कार और भारतीय संस्कृति बनाए रखना आज की जरूरत है। क्षेत्रीय भाषाओं, खासकर हिंदी में संवाद बनाए रखना बच्चों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। -नरेंद्र ठाकुर, प्रचार प्रमुख आरएसएस



स्त्री सम्मान, शक्ति और राष्ट्र निर्माण में माता सीता की सीख अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे कार्यक्रम समाज में भारतीयता और स्वचेतना जगाने के लिए स्वागत योग्य हैं। -एसपी सिंह बघेल, केंद्रीय मंत्री
विज्ञापन

माता सीता आत्मा और समाज की संरक्षक हैं। वैदिक काल से ही भारतीय स्त्रियां विचारशील और स्वतंत्र रही हैं। उनके आदर्श परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में प्रेरणा देते हैं। -स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती





....
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें