दिल्ली विधानसभा में पिछले 17 साल से एक भी भाजपा महिला विधायक नहीं हैं। वर्ष 2003 के बाद से 2008, 2013 और 2015 के चुनाव में एक भी महिला उम्मीदवार को जीत नसीब नहीं हुई है। वहीं कांग्रेस की बात करें तो 1993 से लेकर 2008 तक के चुनाव में हर बार महिला कांग्रेसी विधायक सदन में नजर आई हैं, लेकिन 2013 के चुनाव में आम आदमी पार्टी की एंट्री होने के बाद कांग्रेस की महिला प्रत्याशियों को जीत नहीं मिली। जबकि 2013 से लेकर अब तक विधानसभा में आम आदमी पार्टी की ही महिला विधायक दिखाई दी हैं। 2013 में तीन और 2015 में 6 आप की महिला प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी।
कांग्रेस 15 तो भाजपा 10 फीसदी से आगे नहीं बढ़ी
महिलाओं को टिकट देने के मामले में कांग्रेस 15 तो भाजपा 10 फीसदी से आगे कभी नहीं बढ़ी। 70 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव में हर बार दोनों ही पार्टियों का महिलाओं को टिकट देने का गणित इसी सीमा के बीच में रहा। फिर चाहे वह 1993 का चुनाव हो या 2015 का। पूरे चुनावी इतिहास पर गौर करें तो कांग्रेस और भाजपा हमेशा ही महिला प्रत्याशियों की संख्या कम-ज्यादा करती आई है, लेकिन निश्चित सीमा से आगे बढ़कर महिलाओं को कभी उम्मीदवारी नहीं सौंपी।
महिला उम्मीदवारों पर भाजपा-कांग्रेस का गणित
1993 में कांग्रेस ने 6, भाजपा ने 4 महिलाओं को मैदान में उतारा था। इसके बाद 1998 में कांग्रेस ने 10 और भाजपा ने 5 महिलाओं को चुनाव में आने का मौका दिया। 2003 के चुनाव में कांग्रेस ने 11 महिलाओं को प्रत्याशी बनाया, जो अब तक सबसे ज्यादा है। इसी चुनाव में भाजपा ने 6 महिलाओं को टिकट दिया था। इसके बाद 2008 और 2013 में कांग्रेस ने 6-6 तो भाजपा ने 4-5 महिला उम्मीदवारों को चुना था। वर्ष 2015 में कांग्रेस 5 और भाजपा ने 8 महिलाओं को प्रत्याशी बनाया था।
आप को हुआ फायदा तो बढ़ा भरोसा
2013 के चुनावों में आप ने महिलाओं की सुरक्षा को मुद्दा बनाया। महिलाओं का समर्थन भी काफी मिला था। आप ने 6 महिला प्रत्याशियों को मौका दिया, जिनमें से तीन ने जीत हासिल की। वर्ष 2015 में आप ने फिर 6 महिलाओं को ही उम्मीदवारी सौंपी और सभी विधानसभा में पहुंच गईं। इस बार आप ने दो की बढ़ोतरी करते हुए आठ महिला उम्मीदवारों की घोषणा की है।
वर्ष प्रत्याशी महिला जीतीं वोट प्रतिशत
1993 1316 59 03 58.27
1998 758 61 09 48.99
2003 739 63 07 53.43
2008 794 81 03 57.58
2013 731 71 03 65.13
2015 673 66 06 66.49