उत्तर रेलवे की महिला क्लर्क (लिपिक) दीप्ति मल्होत्रा ने विभाग से 51.86 लाख रुपये की धोखाधड़ी की है। डीआरएम ऑफिस में दीप्ति सैलरी व बिल विभाग में तैनात है। उसने रेलवे के सॉफ्टवेयर की मदद से तीन फर्जी कर्मचारियों की पोस्टिंग दिखाई और उनके नाम से सैलरी दिल्ली के तीन अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा ली। दीप्ति ने अपने सगे भाई के बैंक खाते में 38 लाख से अधिक की रकम ट्रांसफर कराई। अधिकारियों को हेराफेरी का पता चला तब रेलवे के सतर्कता विभाग से जांच कराई गई। आरोप सही पाए जाने पर पहाड़गंज थाने में दीप्ति मल्होत्रा व अन्य के खिलाफ मंगलवार को मामला दर्ज कराया।
उत्तर रेलवे में तैनात असिस्टेंट पर्सनल ऑफिसर विजय कुमार सिंह ने बताया कि दीप्ति मल्होत्रा का काम सैलरी व अन्य बिल बनाना है। कुछ माह पूर्व अधिकारियों ने हिसाब-किताब में 51.86 लाख रुपये की हेराफेरी पाई। छानबीन में पता चला कि दीप्ति ने अपने आधिकारिक सिस्टम से तीन फर्जी कर्मचारियों की भर्ती दिखाकर उनकी सैलरी के नाम पर सारी रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर की है। इनमें 38.64 लाख रुपये सगे भाई मुकुल शर्मा के खाते में ट्रांसफर कराए। अखिलेश सदाना के खाते में 9.98 लाख और एकांत टुटेजा के खाते में 3.24 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए।
छानबीन में पता चला कि दीप्ति ने अपने रेलवे के सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर धोखाधड़ी की। आशंका है कि इसमें दीप्ति के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भी मिलीभगत हो सकती है। दीप्ति बिल बनाकर सीनियर से पास करवाकर भुगतान के आर्डर करवाती थी। सतर्कता विभाग ने भी कई लोगों की मिलीभगत के आरोप लगाए हैं।