राजधानी में महिलाएं सुरक्षित हैं, मगर महिलाओं के अपने ही दुश्मन बने हुए हैं। महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा अपराध अपने ही कर रहे हैं। महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध में 96.5 फीसदी लोग ही पीड़ित के किसी न किसी तरह से परिचित थे। महिलाओं के प्रति अपराध तो कम हुआ है।
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की ओर से सोमवार को जारी किए गए आंकड़ों से ये साफ हो रहा है। राजधानी में हत्या की वारदातें दिल्ली में भी कम हुई हैं। हालांकि दिल्ली केन्द्रशासित प्रदेशों में दिल्ली हत्या के मामले में में पहले स्थान पर है।
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों को देखे तो दिल्ली में महिला की प्रति वर्ष 2015 में 17222, 2016 में 15310 और वर्ष 2017 में 13076 मामले दर्ज हुए थे। महिला के प्रति होने वाले अपराध में दिल्ली का हिस्सा 3.6 फीसदी रहा। हर वर्ष महिलाओं के प्रति अपराध कम हो रहा है।
रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों को देखे तो महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध में 96.5 फीसदी लोग ही परिवार के सदस्य, दोस्त, पड़ोसी, ऑफिसर के लोग व अन्य परिचित शामिल रहे।
ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध में करीब 1186 लोग किसी ने किसी तरह से पीड़ित के परिचित रहें। इसके अलावा 162 परिवार के सदस्य, 537 दोस्त व अन्य परिचित रहे हैं। सिर्फ 467 अपराधी ही ऐसे थे जो पीड़िता के जानकार नहीं थे। महिलाओं के प्रति वर्ष 2017 में दुष्कर्म के 1229 मामले दर्ज हुए थे।
इसके अलावा दिल्ली में हत्या की वारदातें वर्ष 2015 के मुकाबले वर्ष 2017 में कम हुई हैं। दिल्ली में वर्ष 2015 में हत्या की 570 मामले दर्ज हुए थे। वर्ष 2016 में हत्या की वारदातें कम हुई। दिल्ली में वर्ष 2016 में हत्या की वारदातें 528 और वर्ष 2017 में सिर्फ 487 मामले दर्ज हुए थे। केन्द्रशातिस प्रदेशों में हत्या की वारदातों दिल्ली का हिस्सा 2.2 फीसदी रहा।
सीनियर सिटीजन के प्रति अपराध में दूसरे नंबर पर रहा
सीनियर सिटीजन के प्रति होने वाले अपराध में दिल्ली दूसरे नंबर पर रहा है। पहले नंबर में मुंबई रहा है। दिल्ली में सीनियर सिटीजन के खिलाफ अपराध के 2015 में 1176, वर्ष 642 और 2017 में 736 मामले दर्ज हुए थे। वहीं मुंबई में वर्ष 2015 में 1121, वर्ष 1218 और वर्ष 2017 में 1115 मामले दर्ज हुए थे।