आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की 45 वर्षीय महिला ब्रेन ट्यूमर की बीमारी से जीवन-मौत के बीच जूझ रही है। लेकिन एम्स ने उसे ऑपरेशन के लिए दो वर्ष बाद की डेट दे दी।
इतना ही नहीं यदि उसे जल्द ऑपरेशन कराना है तो एम्स के प्राइवेट वार्ड में भर्ती होकर एक लाख 25 हजार रुपये जमा करवाने को कह दिया। हाईकोर्ट ने इस तथ्य को गंभीरता से लेते हुए केंद्र व दिल्ली सरकार और एम्स को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेव ने तीनों पक्षों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि कमजोर वर्ग के मरीजों को निशुल्क स्कीम होने के बावजूद महिला को निशुल्क इलाज क्यों नहीं दिया जा रहा। अदालत ने कहा कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए।
दिल्ली सरकार और एम्स को नोटिस जारी कर जवाब-तलब
पीड़ित महिला
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अदालत ने मामले की सुनवाई 24 अगस्त तय की है। संजय कॉलोनी ओखला निवासी महिला मीरा देवी के अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने अदालत को बताया कि उनकी मुवक्किला का पति निजी कंपनी में नौकरी करता है और मात्र नौ हजार रुपये प्रति माह कमाता है।
उन्होंने कहा कि पत्नी की हालत खराब होने पर उसे एम्स में ले गए व उसे एमआरआई करवाने के लिए कहा गया, इसके लिए एक माह की डेट दी। डॉक्टरों ने कहा कि एमआरआई जल्द करवानी जरूरी है, ऐसे में किसी तरह परिवार ने पांच हजार रुपये का प्रबंध कर निजी लैब से एमआरआई करवाई।
इसके बाद डॉक्टरों ने ब्रेन टयूमर के ऑपरेशन की राय दी और उसे 19 अगस्त 2018 को आने के लिए कहा। उधर, मीरा देवी चलने में असमर्थ हो गई और उसे निरंतर सिर दर्द, शरीर में दर्द , बुखार रहने लगा तो पुन: एम्स ले जाया गया।
डाक्टरों ने कहा कि यदि वह एक लाख 25 हजार रुपये का प्रबंध कर ले तो एम्स के निजी वार्ड में भर्ती कर दिसंबर 2016 में चिकित्सा की जा सकती है।