पड़ोस में रहने वाले दो परिवारों में झगड़ा हो गया और दोनों तरफ से मामले दर्ज करवाएं गए। एक पक्ष ने दूसरे को सबक सिखाने के लिए षड्यंत्र रचा और चार लोगों को गैंगरेप में फंसा दिया।
अदालत ने मामले को फर्जी करार देते हुए सभी चारों को बरी कर दिया। इसी प्रकार अदालत ने दो अन्य मामलों में भी कथित पीड़िताओं के मुकरने पर आरोपियों को बरी कर दिया।
द्वारका अदालत स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश विरेन्द्र भट्ट ने अपने फैसले में कहा कि हरिदास नगर क्षेत्र की महिला का बयान पूर्णत: विरोधाभासी है।
महिला ने पहले 3 मई 14 को दर्ज करवाई प्राथमिकी में कहा कि उसके देवर व तीन अन्य ने उसे पकड़ लिया व छेड़छाड़ की। बाद में उसने मजिस्ट्रेट के सामने 5 मई को दिए बयान एक दम से पलट लिए। महिला ने कहा कि चारों आरोपियों ने उसके साथ जबरन गैंगरेप किया।
मानसिक रूप से परेशान होकर दर्ज करवाया फर्जी मामला
अदालत ने कहा कि सवाल यह उठता है कि महिला ने पहले हरिदास नगर थाने में मात्र छेड़छाड़ का मामला दर्ज क्यों करवाया और बाद में छेड़छाड़ का मामला कैसे गैंगरेप में तब्दील हो गया।
अदालत ने कहा कि पेश साक्ष्यों से स्पष्ट है कि तीन मई को ही एक आरोपी की बेटी ने महिला के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था और उसी दिन कुछ घंटों बाद ही महिला ने मामला दर्ज करवा दिया।
अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच पहले से झगड़ा चल रहा था और उन्होंने एक दूसरे के खिलाफ कई रिपोर्ट दर्ज करवा रखी है। स्पष्ट है कि गैंगरेप का मामला भी मात्र बदला लेने के लिए दर्ज करवाया गया है। महिला भी ठोस साक्ष्य नहींपेश कर पाई ऐसे में वे सभी चारों आरोपियों को बरी करते है।
अदालत ने थाना पालम क्षेत्र में एक प्राईवेट स्कूल के मालिक के बेटे को रेप के आरोप से बरी कर दिया। पीड़िता ने शिकायत में कहा था कि वह स्कूल में शिक्षिका थी और आरोपी आकाश ने उससे विवाह का वायदा कर शारीरिक संबंध बनाए।
मां ने दर्ज करवाई रिपोर्ट, जबरन लिए उसके हस्ताक्षर
इसके बाद वह मुकर गया और शारीरिक संबंध बनाने से मना करने पर नौकरी से निकाल दिया। अदालत में दिए बयानों में वह मुकर गई। उसने कहा कि उससे रेप नहीं हुआ बल्कि मानसिक रूप से परेशान होकर उसने फर्जी मामला दर्ज करवाया था।
अदालत ने इसी प्रकार डाबड़ी क्षेत्र में पड़ोसी युवती से रेप के मामले में आरोपी मनदीप को बरी कर दिया। शिकायत में कहा गया था कि आरोपी ने उसे 16 अक्तूबर 14 को घर बुलाया व रेप कर उसकी विडियो बना ली।
इसके बाद उसे विडियो इंटरनेट पर डालने की धमकी देता रहा। अदालत ने वह बयानों से मुकर गई व कहा कि आरोपी से उसकी एक वर्ष से दोस्ती थी और उसके परिवार को पता था। मां ने स्वयं थाने में शिकायत की उसके जबरन हस्ताक्षर लिए गए।