राजधानी दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों और कर्मियों में संवेदना खत्म होती जा रही है। आपात स्थिति में रविवार रात जीटीबी अस्पताल पहुंची गर्भवती को चिकित्सकों ने भर्ती करने से मना कर दिया।
नतीजतन एक घंटे बाद ही महिला ने अस्पताल के गेट पर नवजात को जन्म दिया। बाद में पुलिस के हस्तक्षेप के बाद जच्चा-बच्चा को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
हर्ष विहार निवासी रामवीर ने बताया कि रविवार रात करीब साढ़े आठ बजे वह पत्नी रीता (25) को लेकर दिलशाद गार्डेन स्थित गुरु तेग बहादुर अस्पताल के आपातकालीन विभाग पहुंचे।
'पहले अल्ट्रासाउंड कराकर लाओ'
शुरू में वहां मौजूद चिकित्सकों ने उसकी पत्नी की स्वास्थ्य जांच की, लेकिन भर्ती करने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि पहले इसका अल्ट्रासाउंड करा कर लाओ।
आपात स्थिति में अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करने की व्यवस्था होती है, लेकिन उन्हें रात के करीब साढ़े नौ बजे बाहर भेजा गया। वह पत्नी को लेकर बाहर निकले, लेकिन रीता दर्द से परेशान थी।
इसी बीच अस्पताल के गेट संख्या पांच के पास रीता ने बच्ची को जन्म दिया।
पुलिस ने किया हस्तक्षेप
रामवीर का आरोप है कि इसके बाद भी जच्चा-बच्चा को अस्पताल में भर्ती नहीं किया जा रहा था। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल दोनों स्वस्थ है।
जीटीबी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बी.के.जैन ने कहा कि पूरे मामले की जांच के लिए तीन डॉक्टरों की कमेटी बनाई गई है। तीन से चार दिन में कमेटी रिपोर्ट सौंप देगी। इसके बाद दोषी चिकित्सक और कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।