महिला की सहमति के बिना उसे छूने का किसी को अधिकार नहीं है। यह टिप्पणी सत्र अदालत ने आर्मी अस्पताल कर्मी की सजा कायम रखते हुए की है।
निचली अदालत ने छेड़छाड़ मामले में दोषी ठहराते हुए कर्मी को छह माह की सजा सुनाई थी। इस फैसले को उसने सत्र अदालत में चुनौती दी थी।
द्वारका जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट ने आर्मी अस्पताल के स्टेनोग्राफर अशोक कुमार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि रिकॉर्ड से साफ है कि याची ने पीड़िता को छेड़छाड़ के इरादे से अपने चैंबर में खींचा।