कड़ाके की ठंड से साइबर सिटी का मेडिकल टूरिज्म कांप रहा है। खाड़ी और अफ्रीकी देशों से आने वाले मरीजों की संख्या में ठंड की वजह से कमी आई है।
बीते महीनों के मुकाबले शहर के विभिन्न कॉरपोरेट अस्पतालों में मरीजों की संख्या में 15-40 फीसदी तक गिरावट आई है। इससे अस्पताल के नजदीक मेडिकल टूरिज्म पर टिकी लोगों की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होने लगी है।
एनसीआर के मेडिकल टूरिज्म में गुड़गांव की भागीदारी सबसे ज्यादा है। सस्ती इलाज और बेहतरी सुविधा की वजह से इराक समेत अफ्रीका व खाड़ी देशों से विदेशी लोग यहां इलाज कराने आते है।
लेकिन ठंड की वजह से इन देशों से मरीजों की संख्या कम हो गई है। मेदांता अस्पताल में अरबी और कुर्दीशा भाषा के इंटरप्रेटर कहते हैं दिसंबर-जनवरी में यहां तापमान चार से पांच डिग्री रहती है, जबकि खाड़ी देशों में इस महीने में भी 15 से 19 डिग्री होती है।
ठंड सहना नहीं चाहते है। नतीजतन, इन महीनों में आना पसंद नहीं करते हैं। बता दें कि बीते महीनों में शहर के नामचीन अस्पतालों में एक महीने में करीब 80-150 मरीज आते थे, लेकिन ठंड और नए साल की वजह से मरीजों की संख्या घटकर करीब 55-70 के करीब पहुंच गई है।
अस्पताल के इंटरनेशनल बिजनेस के एक अधिकारी कहते हैं खाड़ी देशों के अधिकतर अप्वाइंटमेंट फरवरी महीने के आ रहे हैं। फोर्टिस अस्पताल के प्रवक्ता का कहना है कि इंटरनेशनल मरीज कम हुए है, लेकिन ठंड के साथ क्रिसमस और नया साल भी इसकी वजह है।
पारस अस्पताल के जनरल मैनेजर (ऑपरेशन एंड क्वालिटी) डॉ. नीरज बिशभनोई कहते है इराक व अफगानिस्तान से आने वाले मरीज ठंड की वजह से कम हुए है। मरीज के साथ परिवार के अन्य सदस्य भी आते हैं, इसलिए अधिक ठंड में परहेज कर रहे हैं। कोलंबिया एशिया अस्पताल के जनरल मैनेजर महीपाल भनोट कहते है बीते दिनों के मुकाबले अस्पताल में 10-15 फीसदी इंटरनेशनल मरीज कम हुए है। इसमें अधिकतर अफ्रीका और खाड़ी देशों से है।
क्यों आते हैं गुड़गांव
डॉक्टरों की मानें तो खाड़ी देशों में चिकित्सा सुविधा ठीक नहीं होने की वजह से मरीज दूसरे देशों की ओर रुख करते हैं। अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा के मुकाबले यहां एक तिहाई पैसा खर्च में होता है।
वहीं थाईलैंड और सिंगापुर के मुकाबले यहां खर्च लगभग 50 फीसदी है। दिल्ली के नजदीक होने और एयरपोर्ट से सीधी कनेक्टिविटी व एयर एंबुलेंस सुविधा होने की वजह से मरीज गुड़गांव आते हैं। रुपये और डॉलर की अंतर की वजह से भी खाड़ी देशों के मरीजों को यहां फायदा होता है।
इन बीमारियों के लिए मरीज आते हैं
कैंसर, मोटापा कम कराने, स्पाइन सर्जरी, हार्ट सर्जरी, हिप रिप्लेसमेंट, नी रिप्लेसमेंट, लीवर ट्रांसप्लांट, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट, हृदय रोग संबंधी, ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, न्यूरो संबंधी बीमारी।
यहां आते है इराक व खाड़ी देशों से मरीज
अपोलो अस्पताल, मैक्स अस्पताल, फोर्टिस अस्पताल, मेदांता द मेडिसिटी अस्पताल, रॉकलैंड अस्पताल, आर्टेमिस अस्पताल, पार्क अस्पताल आदि।