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माफिया-अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा खनन

Fri, 02 Jan 2015 08:35 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, फरीदाबाद
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इसे व्यवस्था का दोष कहें या कुछ और। करोड़ों रुपये कीमत के सूरजकुंड रोड से पत्थर निकलने की जांच छह महीने से अफसरों के बीच घूम रही है।
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पर, नतीजा सामने नहीं आ रहा है। पत्रकारों के सवाल पर केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता में दावा किया कि समयबद्ध तरीके से मामले की जांच कराऊंगा।

ज्ञात हो कि अनखीर चौक-सूरजकुंड रोड चौड़ीकरण का काम सड़क से पत्थर निकालने की वजह से विवादों में फंस गया है। आरोप है कि हुडा अधिकारियों ने माफियाओं से मिलकर बहुत सस्ते में पत्थर बेच दिए। पत्थर काफी कम भी दिखाए गए हैं।
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11 जुलाई 2014 को तत्कालीन जिला उपायुक्त विजय सिंह दहिया ने सेक्टर-12 प्रदर्शनी हाल में आयोजित प्रेसवार्ता में मामला सामने आने पर एडीसी के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित करने और 15 दिन में रिपोर्ट सौंपने तैयार करने का दावा किया था।

इस बात को हुए छह महीने बीत गए, लेकिन आज तक न तो जांच पूरी हुई और न ही कोई रिपोर्ट आई। यानि पत्थर खनन की जांच अधिकारियों के दफ्तर में ही घूम रही है।

यह भी बताना जरूरी है कि उस वक्त हुडा के कार्यकारी अभियंता भूपेंद्र सिंह ने कहा था कि पत्थर निकालने के लिए खनन विभाग की अनुमति ली गई है। करीब 30 हजार क्यूबिक मीटर पत्थर निकला है, जिसे 320 रुपये क्यूबिक मीटर की दर पर पाली क्रेशर जोन में बेचा गया है।

कुल मिलाकर 96 लाख रुपये का पत्थर निकला है। अनखीर चौक से सूरजकुंड चौक तक सड़क बनाने में खुदाई के दौरान इतना कम पत्थर निकलने का रिकार्ड देना किसी के गले नहीं उतरा।

11 दिसंबर 2014 को प्रेसवार्ता में वर्तमान जिला उपायुक्त डॉ. अमित अग्रवाल के सामने मामला आने पर उन्होंने भी जल्द इसकी जांच कराने का वादा किया था, लेकिन आज तक जांच पूरी नहीं हुई।  

उपायुक्त का कहना है कि अभी तक सरकार की नई योजनाओं और बैठकों के चलते इस पर ध्यान नहीं गया है। जल्द ही मामले की जांच करा रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

यह है प्रोजेक्ट
हुडा ने गुड़गांव मोड़ से अनखीर चौक और अनखीर चौक से सूरजकुंड चौक गोल चक्कर तक सड़क को चौड़ा करने का काम शुरू कराया है। इसका करीब 60 फीसदी काम पूरा हो गया है।

करीब 12 किलोमीटर लंबे रोड के पुनर्निर्माण पर हुडा की ओर से 85 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसका कार्य हुडा अधिकारियों ने 31 अगस्त 14 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। बताया जाता है कि पत्थर की खुदाई सात से आठ किलोमीटर में होनी है।

किसके इशारे पर बनी पत्थर निकालने वाली डीपीआर
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली में पत्थर खनन पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। कुछ ही पत्थर की खानें यहां वैध रूप से चल रही हैं। इसलिए अब पत्थर को पारस बनाकर बेचने वालों की नजर इस रोड पर लगी हुई थी।

हर जगह सड़कें ऊंची की जा रही हैं, लेकिन सूरजकुंड रोड के नीचे से पत्थर निकालकर उसे और गहरा किया गया है। समझा जाता है कि खनन माफियाओं की मिलीभगत से यह पत्थर निकाला गया है।
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हालांकि हुडा अधिकारियों का कहना है कि इस रोड की डीपीआर जैसी बनी थी, उसके हिसाब से ही काम हो रहा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि इसकी डीपीआर किस व्यक्ति के इशारे पर ऐसी बनाई गई, जिसमें पहले से बनी हुई सड़क की खुदाई करके पत्थर निकालने की जरूरत पड़ी।
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