क्या देश में एक बार फिर से लॉकडाउन लगाने की तैयारी की जा रही है? यह सवाल लोगों ने तब पूछना शुरू कर दिया जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने देश के गृहमंत्री अमित शाह से बुधवार को मुलाकात की।
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को अमर उजाला से विशेष बातचीत की। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण लोगों के सामने कोरोना से ज्यादा गंभीर संकट रोजी-रोटी का खड़ा हो गया था।
लोगों की आर्थिक हालत खराब होने लगी। लोगों को अपनी नौकरियों को खोने का डर और तनाव इस हद तक बढ़ने लगा कि लोग मानसिक अवसाद के शिकार होने लगे थे।
डर इस बात का पैदा हो गया था कि अगर लॉकडाउन नहीं खोला गया, तो कोरोना से ज्यादा लोगों की मौत उनके बेरोजगार होने, आर्थिक बदहाली और तनाव पैदा होने के कारण हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस तरह की परिस्थिति को देखते हुए ही सरकार को लॉक डाउन खोलना पड़ा।
अगर उपमुख्यमंत्री की बात को आधार मानें तो इस बात के आसार कम ही नजर आते हैं कि सरकार दुबारा लॉकडाउन लगाने का फैसला कर सकती है। केंद्र या राज्य, किसी भी तरफ से अभी तक लॉकडाउन को लेकर कोई संकेत भी नहीं दिए गये हैं।
हालांकि, जिन इलाकों में कोरोना के ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं, उन इलाकों में पाबंदी बढ़ाई जा सकती है।
केंद्र सरकार की सूचनाओं को साझा करने वाली संस्था पीआईबी ने मीडिया में चल रही इस तरह की खबरों को फेक करार दिया है। संस्था ने एक खबर का हवाला देते हुए कहा है कि देश में लॉकडाउन लगाने जैसा कोई फैसला नहीं लिया गया है।