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...तो क्या इनलो को आरके से मिलेगा 'आनंद'?

Sat, 15 Mar 2014 03:20 PM IST
ओम प्रकाश/अमर उजाला, फरीदाबाद
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यह लोकसभा सीट अब तक कांग्रेस और भाजपा के कब्जे में रही है। इनेलो ने यहां कई बार भाजपा एवं अन्य पार्टियों को समर्थन दिया। अकेले सिर्फ 2004 में लड़ा, लेकिन सफलता नहीं हासिल हुई। इस बार पार्टी ने यहां पंजाबी कार्ड खेला है। इनेलो का गणित है कि परंपरागत वोटों के साथ उसे पंजाबी समाज के वोट मिल गए तो बेड़ा पार हो जाएगा।
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इस सीट पर अब तक किसी भी प्रमुख पार्टी ने मजबूत पंजाबी प्रत्याशी नहीं उतारा है। इसीलिए इनेलो को उम्मीद है कि 1.26 लाख पंजाबी और उसके पारंपरिक वोट मिलकर बेड़ा पार कर देंगे। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस की तरह भाजपा और अन्य पार्टियों ने भी गुर्जर प्रत्याशी पर ही दांव लगाया तो आनंद का रास्ता साफ हो सकता है। बहरहाल देखना यह है कि आनंद जनता की अदालत में खुद के बारे में क्या बताते हैं।

आनंद इस समय भारतीय ओलंपिक संघ उपाध्यक्ष और झारखंड ओलंपिक संघ के अध्यक्ष हैं। इसलिए खिलाड़ियों के वोटों पर भी उनका दावा होगा। आनंद वर्ष 2000 में झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। उन्होंने 1963 में एसडी कॉलेज पलवल से ग्रेजुएशन किया था।
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उधर, विरोधियों का कहना है कि आनंद बाहरी प्रत्याशी हैं। हाईप्रोफाइल व्यक्तित्व के चलते कॉलोनियों और गांवों के वोटरों में उनकी पहुंच नहीं है। आरके आनंद का कहना है कि वे बिजली, पानी की कमी से जुड़े बुनियादी मुद्दे उठाएंगे। कांग्रेस शासन में जमीनों के अधिग्रहण का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाकर वे किसान मतों पर दावेदारी जताएंगे।
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फरीदाबाद सीट पर इनेलो
-1998 में बसपा को समर्थन दिया। बसपा से चुनाव लड़े धर्मवीर भड़ाना चौथे नंबर पर रहे। उन्हें कुल 118009 (13.12 फीसदी) वोट मिले।
-1999 में भाजपा को समर्थन दिया। भाजपा के रामचंद्र बैंदा ने 3,67,842 (49.34 फीसदी) वोटों के साथ जीत दर्ज की।
-2004 में मोहम्मद इलियास (इनेलो) हारे। उन्हें कुल 2,05,355 (24.31 फीसदी) वोट मिले थे। पार्टी दूसरे नंबर पर रही।
-2009 में भाजपा को समर्थन दिया। रामचंद्र बैंदा 1,89,663 (30.35 फीसदी) वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे।
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