प्रदेश भाजपा ने चुनाव की घोषणा का स्वागत किया है, लेकिन टिकट के दावेदारों के होश उड़ गए हैं। टिकट की दावेदारी पर मुहर नहीं लगने से उन्हें डर है कि एक महीने से कम समय में चुनाव की तैयारी कैसे होगी, जबकि आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी घर-घर घूम रहे हैं। बता दें कि अभी तक प्रदेश भाजपा की चुनाव समिति भी नहीं बनी है, जो दावेदारों की सूची फाइनल कर सके। ऐसे में दावेदारों को डर है कि कहीं पैराशूट से प्रत्याशी न उतारे जाएं।
दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीख का इंतजार तो सभी राजनीतिक पार्टियों को था, लेकिन प्रचार के लिए इतना कम समय मिलेगा, यह नेताओं के सोच से परे है।
चुनाव प्रचार के लिए प्रत्याशियों को एक महीने का भी वक्त नहीं मिलेगा। ऐसे में टिकट के दावेदार इस चिंता में हैं कि उनका कैंपेन कैसे पूरा होगा। टिकट के कई दावेदारों का तो यहां तक कहना है कि सिर्फ मोदी के चेहरे पर चुनाव नहीं लड़ा जा सकता। क्षेत्र की जनता अपने प्रत्याशियों की छवि भी देखना चाहती है।
भाजपा की चुनाव समिति भी नहीं बनी है। इसके कारण अभी तक दावेदारों की स्क्रीनिंग तक नहीं हुई है। इस काम में भी करीब एक सप्ताह का समय लगता है। तब जाकर केंद्रीय चुनाव समिति की मुहर प्रत्याशियों पर लगती है। ऐसे में चुनाव प्रचार के लिए महज 20 दिनों का ही वक्त मिलेगा।