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वर्ष 2047 तक दिल्ली को बनाएंगे नॉलेज कैपिटल : आशीष सूद

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-डीयू के महाराजा अग्रसेन कॉलेज में शिक्षा मंत्री ने नई शैक्षणिक सुविधाओं का किया शुभारंभ
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-शिक्षा मंत्री आशीष सूद की घोषणा शैक्षिक संस्थानों में नहीं होगी फंड की कमी, 7 हजार कक्षाएं बनेंगी स्मार्ट क्लासरूम

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार का लक्ष्य केवल पांच वर्षों तक सीमित नहीं है, बल्कि 2047 तक जब देश स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, दिल्ली को नॉलेज कैपिटल के रूप में स्थापित करना है। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने यह बातें डीयू के महाराजा अग्रसेन कॉलेज में स्टूडेंट फैसिलिटी सेंटर का उद्घाटन के अवसर पर कहीं। उन्होंने इंडियन नॉलेज ट्रेडिशन सेंटर का शिलान्यास किया। साथ ही स्पोर्ट्स फैसिलिटी लाउंज, मल्टीमीडिया सेमिनार हॉल, पांच स्मार्ट क्लासरूम और आरएफआईडी सक्षम लाइब्रेरी मैनेजमेंट सिस्टम का भी शुभारंभ किया गया। अध्यक्षता डीयू के डीन ऑफ कॉलेजेज प्रो बलराम पाणी ने की। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री ने कहा कि दिल्ली में किसी भी उच्च शिक्षा संस्थान को अब फंड की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि न तो किसी शिक्षक की गरिमा पर आंच आने दी जाएगी और न ही कोई छात्र आधारभूत सुविधाओं के अभाव में पीछे रहेगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार शिक्षा क्षेत्र में स्केल और स्पीड के साथ काम कर रही है।
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दिल्ली को डिग्री वितरण केंद्र नहीं बल्कि ज्ञान उत्पादन केंद्र बनाना

सूद ने कहा कि अब दिल्ली का शिक्षा मॉडल केवल कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजधानी के प्रत्येक कोने तक पहुंचेगा। डीयू कॉलेजों, तकनीकी संस्थानों, पॉलिटेक्निक और रिसर्च सेंटर्स को एकीकृत मोड में आगे बढ़ाएगा। दिल्ली सरकार का उद्देश्य दिल्ली को डिग्री वितरण केंद्र नहीं बल्कि ज्ञान उत्पादन केंद्र बनाना है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि कि स्टूडेंट फैसिलिटी सेंटर से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा, जबकि इंडियन नॉलेज ट्रेडिशन सेंटर भारतीय ज्ञान, संस्कृति और परंपराओं के अध्ययन व अनुसंधान को नई दिशा देगा। स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल लाइब्रेरी प्रणाली से शिक्षण-प्रशिक्षण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कक्षा 9 से 12 तक की 7 हजार कक्षाओं को स्मार्ट क्लासरूम में बदला जाएगा और विद्यार्थियों को शैक्षिक भ्रमण व इंटर्नशिप के अवसर भी प्रदान होंगे। इस कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध दिल्ली सरकार द्वारा पूर्णत: वित्तपोषित 12 महाविद्यालयों के प्राचार्यों का एक प्रतिनिधिमंडल भी उपस्थित था। मालूम हो कि पिछले 10 वर्षों से इन महाविद्यालयों को सरकारी अनुदान से वंचित रहना पड़ा था, जिससे इन संस्थानों में फंड का गंभीर संकट हो गया था।
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