एमसीडी के खातों की जांच दिल्ली सरकार की कमेटी करेगी। तीनों एमसीडी के खातों और दिए गए फंड की जांच के लिए मंडलायुक्त ए एनबरासु की अध्यक्षता में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कमेटी गठित की है।
कमेटी एक सप्ताह में फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इस आदेश की प्रति तीनों एमसीडी आयुक्तों को भेजी गई है। हालांकि जांच-पड़ताल की रिपोर्ट को लेकर एमसीडी कितना सहयोग करेगी, इसे लेकर आशंका जरूर है। हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी बताते हैं कि जब दिल्ली सरकार फंड देती है तो जांच करा सकती है।
शहरी विकास विभाग के अतिरिक्त सचिव संदीप मिश्रा को कमेटी का सदस्य सचिव बनाया गया है। कमेटी के अध्यक्ष को यह शक्ति दी गई है कि वो चाहें तो किसी भी अधिकारी को अपने साथ जोड़ सकते हैं। इसमें डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, एडीएम, एसडीएम को रिकार्ड निरीक्षण और छंटनी के लिए कमेटी में शामिल कर सकते हैं। कमेटी को डीएमसी एक्ट, 1957 की धारा 485-486 में शक्ती दी गई है।
उपमुख्यमंत्री ने आदेश में कहा है ये
उपमुख्यमंत्री ने आदेश में कहा है कि एमसीडी के डॉक्टर, टीचर, नर्स, सफाई कर्मचारी पिछले करीब एक साल से बार-बार वेतन व सुविधाएं नहीं मिलने को लेकर हड़ताल और धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे जनता को परेशानी हो रही है। खस्ताहाल को देखते हुए दिल्ली सरकार ने अस्पतालों को टेकओवर करने की मांग भी एमसीडी से की थी।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एमसीडी के आयुक्तों व वरिष्ठ अधिकारियों केसाथ आर्थिक हालात की समीक्षा की थी। उसमें यह बात सामने आई थीं दिल्ली सरकार योजना और गैर योजना मद की आवंटित राशि का भुगतान कर चुकी है।
आदेश में कहा गया है कि एमसीडी को डीएमसी एक्ट, 1957 की धारा 42 में जिन सुविधाओं को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है, वे सुविधाएं उपलब्ध कराने में असफल रही है।
खातों की जांच का मामला राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। इसमें यह तथ्य भी सामने आ रहा है कि जिस तरह बिजली कंपनियों के खातों की जांच नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) से कराया गया है, उसी तरह इस कमेटी की रिपोर्ट के हवाले से एमसीडी के खातों की अलग से कैग ऑडिट कराने की तैयारी हो। आगामी एमसीडी चुनाव को देखते हुए इसे सीधे तौर पर राजनीतिक लड़ाई में इस्तेमाल करने से जोड़कर देखा जा रहा है।