सरकार ने 27 जून से 6 जुलाई के बीच दिल्ली के हर घर का सर्वे करने का निर्णय किया है, जिससे इस समय कोरोना के सभी मरीज सामने आ सकें। माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद राजधानी में कोरोना के सभी मरीज सामने आ जाएंगे और यह दिल्ली में कोरोना का सर्वोच्च पॉइंट हो सकता है।
अनुमान है कि दिल्ली की आबादी लगभग दो करोड़ तक पहुंच चुकी है। वैध-अवैध कुल मिलाकर 45 लाख से अधिक मकानों में ये लोग रहते हैं। दिल्ली सरकार के निर्णय के मुताबिक इनकी स्क्रीनिंग के लिए 15 हजार टीमें बनाई जाएंगी, जिनमें कुल मिलाकर 55 हजार से अधिक लोगों को लगाया जाएगा।
हर जिले में एक हजार से 1500 लोगों की टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच करेंगी। शनिवार 27 जून से 6 जुलाई के बीच यह स्क्रीनिंग प्रोसेस पूरा किया जाना है। समय की कमी को देखते हुए इसे कठिन काम माना जा रहा है।
इसके पहले ही कोरोना कंटेनमेंट जोन के हर घर के सर्वे को 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसका काम इस समय चल रहा है। इसके लिए रोजाना 18-20 हजार एंटीजन-आरटी-पीसीआर टेस्ट किए जा रहे हैं।
दिल्ली सरकार के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक, कोरोना संक्रमण फैलने में लोगों की आवाजाही पर लगाम न लग पाना सबसे बड़ा कारक साबित हुआ था। अब झुग्गी-झोपड़ी की संकरी गलियों तक पहुंचकर हर घर का सर्वे करना बड़ा चैलेंज साबित होने जा रहा है।
लेकिन तीन से चार लोगों की टीम बनाकर इन्हें लोगों के घर-घर में भेजा जाएगा। इसके लिए स्वयं सेवकों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है जो इस काम को अंजाम तक पहुंचाएंगे।