दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेस-वे पर तीन माह बाद वाहन चालक फर्राटा भरते नजर आएंगे। एक्सप्रेस-वे स्थित सिरहौल टोल प्लाजा के बंद होने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इसे तीन माह के भीतर हटाने के आदेश दिए हैं। एनएचएआई के आदेश के बाद टोल हटाने को लेकर कवायद शुरू हो गई है।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेस-वे संचालक कंपनी डीजीएससीएल पर बकाया राशि जमा कराने के मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद गत वर्ष 19 फरवरी को सिरहौल टोल प्लाजा को बंद करने के आदेश दे दिए। तत्कालीन कंपनी के सरेंडर होने के बाद एनएचएआई ने मिलेनियम सिटी एक्सप्रेस-वे प्राइवेट लिमिटेड को एक्सप्रेस-वे की जिम्मेवारी सौंपी दी। टोल प्लाजा के बंद होने के एक साल बाद एनएचएआई ने मौजूद कंपनी को नोटिस जारी करते हुए टोल के ढांचे को हटाने का आदेश दिया है। जिसमें एनएचएआई ने तीन माह का समय दिया है इसके अलावा देरी पर दस हजार रुपये प्रतिदिन का जुर्माना वसूलने का आदेश दिया है।
एनएचएआई के आदेश के बाद मौजूदा कंपनी ने ढांचा हटाने की कवायद शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक रोजाना करीब सवा दो लाख वाहन सिरहौल टोल प्लाजा से आवाजाही करते हैं। देश के सबसे बड़े टोल प्लाजा कहे जाने वाले सिरहौल टोल पर 32 लेन है, जिसमें फिलहाल दिल्ली नगर निगम छह लेन पर एमसीडी टैक्स वसूल रही है। एनएचएआई के आदेश को लेकर हालांकि टोल प्रबंधन कंपनी ने यहां टोल के ढांचे को हटाने के बजाय फुट ओवरब्रिज या फिर सब-वे के निर्माण के लिए प्रस्ताव रखने की तैयारी की है।
सीईओ एस रघुरमन के मुताबिक नए एफओबी के निर्माण में करीब 6.5 करोड़ की लागत आएगी, ऐसे में इस ढांचे का उपयोग कर करीब 2.5 करोड़ में निर्माण कराया जा सकता है। हालंाकि इस पर एनएचएआई की तरफ से कोई सहमति नहीं मिली है। हालांकि लेन पर बने टोल बूथ को हटाया जाएगा। तीन माह की मिली अवधि में बताया जा रहा है कि जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। इसके बाद दिल्ली आने-जाने वाले वाहनों को काफी राहत मिलेगी।