घनी आबादी वाले शहर में कुछ वक्त हरे-भरे क्षेत्र में गुजारने और पहाड़ों से निकलने वाले झरने को देखने का मौका दिल्लीवासियों को भी मिलेगा।
दरअसल, दिल्ली विकास प्राधिकरण ने फैसला लिया है कि जल्द ही तिलपत घाटी जैव वैविध्य योजना का काम आरंभ किया जाए। इसके तहत लगभग 70 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इस घाटी का सौंदर्यीकरण होगा।
दक्षिणी दिल्ली स्थित तिलपत वैली में 12 महीने पहाड़ों से निकलने वाला झरना है, जो घाटी की खूबसूरती को बढ़ाता है। घाटी के विकास से तिलपत घाटी जैव वैविध्य पार्क में वन्य जीव भी आ सकेंगे, क्योंकि यह क्षेत्र असोला और भट्टी वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर से जुड़ा है।
कैसी होगी ये घाटी?
डीडीए उपाध्यक्ष बलविंदर कुमार ने बताया कि रविवार को तिलपत घाटी जैव वैविध्य का निरीक्षण करने के बाद योजना का खाका तैयार कर लिया गया है। भूमि संरक्षण के लिए कनिष्ठ अभियंता और 20 गार्ड तैनात किए जाएंगे।
प्रोफेसर बाबू वहां पौधों की स्थानीय किस्में लगाकर काम शुरू कराएंगे। यह घाटी एक तरफ इग्नू और सार्क यूनिवर्सिटी से तो दूसरी तरफ सैनिक फार्म्स व संगम विहार से घिरी है।
घाटी में बड़ा कैचमेंट और पानी का रिचार्जिंग जोन है, लिहाजा पानी की रिचार्जिंग और सतही जलाशयों का विकास हो सकेगा। इसके अलावा सूखे पतझड़ी वन किस्मों, घास स्थल और बंबू का विकास भी होगा।
तिलपत घाटी में तेंदुए भी आ सकेंगे
योजना के शुरू होने से तिलपत घाटी तेंदुओं का घर भी बन सकता है, क्योंकि असोला वन्य जैव अभ्यारण्य हरियाणा से जुड़ा हुआ है।
इसके विकास से हरियाणा में पाए जाने वाला तेंदुआ आ सकेगा, क्योंकि यहां नीलगाय की बहुतायत होगी। यह इलाका तीन तरफ से घाटियों से जुड़ा है। लिहाजा पहाड़ से पानी झरने के रूप में आता है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी जैव वैविध्य पार्क के इंचार्ज फैय्याज खुदसर ने बताया कि यहां झरना धीरे-धीरे विलुप्त हो रहा है। योजना के तहत प्राकृतिक झरनों को ठीक किया जा सकेगा।