लोगों की मौजूदगी में पत्नी द्वारा पति को थप्पड़ मारना खुदकुशी करने का पर्याप्त कारण नहीं हो सकता। यह टिप्पणी हाईकोर्ट ने एक महिला को पति को खुदकुशी के लिए विवश करने के आरोप से मुक्त करते हुए की। निचली अदालत ने महिला पर खुदकुशी के लिए विवश करने की धाराओं में मार्च 2017 में आरोप तय किए थे।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने अपने फैसले में कहा कि अगर कोई शख्स थप्पड़ मारने को खुदकुशी के लिए उकसाने का आधार मानता है तो थप्पड़ मारने का कृत्य ऐसा होना चाहिए जो किसी भी सामान्य व्यक्ति को खुदकुशी के लिए विवश ही कर दे। इसके मद्देनजर याची पर खुदकुशी के लिए विवश करने की धाराओं में आरोप तय करना गलत है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, दंपती का विवाह 25 फरवरी 2015 को हुआ था। इसके बाद उनकी एक बच्ची भी हुई। उसी साल मई में पत्नी मतभेद के कारण पति का घर छोड़कर अपने मायके चली गई। इस घटना के बाद दो अगस्त 2015 को पति ने खुदकुशी करने की कोशिश की। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने मृतक के बेड से एक सुसाइड नोट बरामद किया और उसके आधार पर पत्नी के खिलाफ खुदकुशी के लिए विवश करने की धाराओं में केस दर्ज किया था। निचली अदालत ने पत्नी पर आरोप तय करते हुए इस बात पर गौर किया कि उसने अपने पति को अन्य लोगों की मौजूदगी में 31 जुलाई 2015 को थप्पड़ मारा था। इसके दो दिन बाद पति ने खुदकुशी कर ली थी।