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क्यों टूट रहे पति-पत्नी के रिश्ते, क्या तकनीकी बन रही सौतन

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अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे फिर सात जन्मों तक साथ जीने-मरने की कसम लेकर नए जीवन की शुरुआत करने वाले पति-पत्नी के रिश्तों में कड़वाहट आम होती जा रही है। बदलते परिवेश में छोटी-छोटी बातों को लेकर रिश्ते टूट रहे हैं।
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गौतमबुद्ध नगर जिला सत्र न्यायालय में बीते साल फैमिली कोर्ट में कुल 2876 मामले आए जिनमें से सबसे ज्यादा 1607 याचिकाएं तलाक (धारा-13) के लिए दाखिल की गई हैं।

तलाक के बाद भरण पोषण (धारा-125) के लिए 988 मामले आए हैं। बाल संरक्षण के लिए 99 और धारा-24 के तहत पत्नी द्वारा (मुकदमे की कार्यवाही और अपने रखरखाव) 173 याचिकाएं दाखिल हुईं है।
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इसके अलावा खर्च की वसूली के लिए भी 9 लोगों के मामले सामने आए हैं। अहम के चलते भावनाओं की कद्र न करने से पारिवारिक मतभेद और रिश्तों के बीच दूरी बढ़ रही है। कोर्ट के अलावा जिलाधिकारी कार्यालय में भी शिकायत करने वालों की संख्या बढ़ रही है।

मोबाइल-इंटरनेट से टूट रहे रिश्ते

इन सभी मामलों के निपटारों की स्थिति पर नजर डालें तो इनकी गति काफी धीमी है। ज्यादातर मामले लंबे खिंचते हैं। कुल मामलों में केवल 191 याचिकाओं पर सुलह-समझौता हुआ है। सबसे ज्यादा मामलों के निपटारे धारा-13 में 131, धारा-125 में 40 हुए हैं।

पारिवारिक मामलों के जानकार एडवोकेट मनोज तेवतिया ने बताया कि आज के समय में लोग कम उम्र में ही सब कुछ पा लेने की इच्छा रखते हैं।

इससे शादी के बात रिश्ते प्रभावित होते हैं। इसके अलावा मोबाइल और इंटरनेट भी पति-पत्नी के बीच दूरी पैदा कर रहे हैं। आए दिन ऐसे मामले देखने को मिलते हैं।
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रिश्ते की भावना को समझें

शारदा यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र की प्रोफेसर डॉ. उर्मिला यादव कहती हैं कि बदलते परिवेश में पति-पत्नी के बीच मतभेद बढ़ता जा रहा है। उनमें अहंकार की भावनाएं ज्यादा हो गई हैं।

नैतिक मूल्यों का अभाव है, जिससे रिश्ते टूट रहे हैं। एकल परिवार में ऐसी समस्याएं सबसे ज्यादा देखने को मिलती हैं। लोग छोटी-छोटी बातों का पहाड़ बना देते हैं। ऐसे में सभी को एक-दूसरे की भावनाओं को समझना जरूरी है।
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