लोनी के छह गांवों के किसानों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। किसानों ने अपने घरों के बाहर ‘मकान बिकाऊ हैं’ के बोर्ड लगा दिए हैं। भूमि अधिग्रहण के मुआवजा की मांग को लेकर लड़ रहे किसानों का आरोप है कि उनके नेता मनवीर तेवतिया का गाजियाबाद में प्रवेश रोक दिया गया है। इसलिए वह मनवीर तेवतिया के बिना प्रशासन से कोई वार्ता नहीं करेंगे।
बृहस्पतिवार को किसानों और प्रशासन की वार्ता होनी थी, जिसमें कुछ किसानों ने प्रशासन से मीटिंग की, लेकिन ज्यादातर किसान मुंह पर काली पट्टी बांधकर अपने घरों के सामने ही धरने पर बैठ गए । प्रशासन ने तनाव बढ़ता देख मनवीर तेवतिया समेत तीस के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। गॉव में भारी पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया है।
किसानों का कहना है कि उनके नेता की एंट्री पर प्रतिबंध लगाकर प्रशासन ने किसानों का अपमान किया है। तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस-पीएसी बल के साथ बृहस्पतिवार की सुबह से ही प्रशासनिक अधिकारी मंडोला गांव में कैंप किए हुए हैं।
दो दिसंबर से लोनी क्षेत्र के गांव मंडोला, नानू, पंचलोक, नवादा, मिलक आदि के ग्रामीण प्रदेश सरकार की भूमि अधिग्रहण नीतियों के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। इस दौरान किसानों ने सीरिज में धरना प्रदर्शन, कैंडल मार्च, आमरण अनशन भी किया था मगर कोई हल नहीं निकला।
इसी क्रम में किसानों ने बृहस्पतिवार को किसान नेता मनवीर तेवतिया की अगुवाई में शांति मार्च निकालने की योजना बनाई थी। कार्यक्रम लगभग तय हो चुका था मगर इससे पूर्व ही डीएम मिनिस्ती एस. ने एसपी ग्रामीण और खुफिया विभाग की रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए शांति व्यवस्था के लिए मनवीर तेवतिया की गाजियाबाद में एंट्री 30 जून की रात 12 बजे तक प्रतिबंधित कर दी।
प्रशासन के इस आदेश की खबर जैसे ही स्थानीय किसानों को हुई उन्होंने विरोध शुरू कर दिया। किसानों की मांग है कि उनके नेता पर लगाए गए प्रतिबंध को तत्काल समाप्त किया जाए। किसानों ने अपने घरों पर ‘किसानों के मकान बिकाऊ हैं’ के साथ ‘डीएम जाओ-तेवतिया को वापस लाओ’ जैसे नारे लिख दिए हैं।
नाराज किसानों का कहना है कि यदि सोमवार तक वार्ता नहीं हुई तो मंगलवार सुबह किसान मकान खाली कर लोनी से कहीं और जाकर बस जाएंगे।