हाईकोर्ट ने आईपीएस अधिकारियों के रवैये पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस के अधिकारी आराम से कहीं भी चले जाते हैं लेकिन नाबालिगों के सुधार व सुरक्षा के लिये बाल सुधार गृहों में जाने को तैयार नहीं हैं। हाईकोर्ट ने इस मामले में दिल्ली सरकार से जल्द योजना बनाने के लिये कहा है। मामला आईपीएस अधिकारियों द्वारा दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग में जाने पर अनिच्छा से जुड़ा है।
जस्टिस एसआर भट व जस्टिस आरके गाबा की खंडपीठ ने कहा कि जब आईपीसी अधिकारी एनजीओ में जा सकते है तो दिल्ली सरकार में क्यों नहीं जा सकते। प्रतिनियुक्ति पर काम करने को उनकी नौकरी का हिस्सा बनाने की जरूरत है।
खंडपीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार शीघ्र महिला एवं बाल विकास विभाग में दिल्ली पुलिस अधिकारियों के सेल पर योजना तैयार करे। मामले की सुनवाई के लिए दस अप्रैल की तारीख तय की गयी है। खंडपीठ ने अगली सुनवाई पर पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों को पेश होने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील ने खंडपीठ को बताया कि सरकार ने दिल्ली पुलिस अधिकारियों के साथ 22 फरवरी को बैठक की थी। इस दौरान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने दिल्ली सरकार में प्रतिनियुक्ति पर काम करने में अनिच्छा जाहिर की थी।